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कलिंगा कंपनी पर माप में हेरफेर का आरोप, एनसीएल खदानों में नियमों की अनदेखी

ओबी रिमूवल में भारी गड़बड़ी का आरोप, एनसीएल को करोड़ों के राजस्व नुकसान की आशंका

सिंगरौली। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल), सिंगरौली क्षेत्र में संचालित खदानों में ओबी रिमूवल कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक अमलोरी एवं झिंगुरदा खदान (मध्यप्रदेश) तथा खड़िया खदान (उत्तर प्रदेश) में कलिंगा कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (KCCL) द्वारा किए जा रहे उपकरण किराया आधारित ओबी रिमूवल कार्य में नियमों की अनदेखी की गई है, जिससे एनसीएल को बड़े पैमाने पर राजस्व हानि होने की संभावना जताई जा रही है अमलोरी खदान (मध्यप्रदेश) में आरोप है कि वास्तविक लीड दूरी 4 किलोमीटर से कम होने के बावजूद उसे 5 किलोमीटर से अधिक दर्शाकर माप में हेरफेर किया गया। इसके साथ ही टॉप सरफेस एवं कोल बेंच सरफेस के ऊपर ओबी मात्रा को आवश्यकता से अधिक दिखाने की बात भी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक संचयी इन-सीटू मात्रा और मासिक बिलिंग के तुलनात्मक अध्ययन से इस गड़बड़ी की पुष्टि हो सकती है एनआईटी योजना के तहत ड्रैगलाइन बेंच निर्माण स्थल के पुनर्स्थापन (रीलोकेशन) कार्य में भी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं झिंगुरदा खदान (मध्यप्रदेश) में कोयला उत्पादन की बिलिंग को ओबी रिमूवल के रूप में दर्शाए जाने का आरोप है, जिससे ठेकेदार कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचने की बात कही जा रही है। इसके अलावा 190 आरएल से 150 आरएल स्तर तक जलमग्न ओबी बेंचों की डीवाटरिंग का कार्य एनसीएल द्वारा कराए जाने के बावजूद उसका लाभ ठेकेदार को दिए जाने का आरोप भी सामने आया है। ऊपरी एवं निचली बेंचों पर ओबी मात्रा के अत्यधिक मापन (ओवर-एक्सेस) की शिकायतें भी की गई हैं सूत्रों का यह भी कहना है कि एनआईटी सीमा (बाउंड्री) से बाहर अतिरिक्त क्षेत्र KCCL को आवंटित किया गया, जबकि नियमानुसार ऐसे कार्य के लिए नया टेंडर जारी किया जाना आवश्यक था। इसके बावजूद एनसीएल को कोयले की अनुमानित मात्रा केवल एनआईटी सीमा के भीतर से ही प्राप्त हो रही है खड़िया खदान, एनसीएल (उत्तर प्रदेश) से संबंधित मामलों में भी इसी प्रकार की अनियमितताओं की चर्चा है, हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है सबसे गंभीर बात यह है कि इन आरोपों के बावजूद नगर निगम अध्यक्ष, महापौर एवं संबंधित विभागीय अधिकारी मामले पर कोई ठोस ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में मौन क्यों हैं और कंपनी के विरुद्ध अब तक कोई जांच या दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

फिलहाल, यह मामला जांच का विषय है और संबंधित विभागों से पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है।

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