वर्दी पहनने के लिए मिली है, घर की खूंटी पर टांगने के लिए नहीं—गढ़वा थाने में वर्षों से जमे आरक्षकों पर उठे सवाल
तबादला हुआ, फिर भी गढ़वा वापसी… आरक्षक अजीत उपाध्याय और नवीन सिंह को किसका संरक्षण किसके कहने पर गढ़वा थाने में लंबे समय से पदस्थ है

सिंगरौली जिले के गढ़वा थाने में पदस्थ आरक्षक अजीत उपाध्याय और नवीन सिंह पिछले कई वर्षों से लगातार इसी थाने में पदस्थ हैं। जानकारी के अनुसार दोनों को गढ़वा थाने में पदस्थ हुए लगभग 10 साल से अधिक का समय हो चुका है। इस बीच तबादला भी हुआ, लेकिन घूम-फिरकर फिर से गढ़वा थाने में पहुंच गए। अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या है कि इनका तबादला होने के बाद भी दोबारा गढ़वा थाने में आना तय हो जाता है? आखिर किस नेता या किस प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण इन्हें प्राप्त है अजीत उपाध्याय सिविल ड्रेस में कभी भी, किसी भी समय लोगों से पूछताछ करने लगते हैं। गाड़ियों से वसूली के आरोप भी स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, क्षेत्र में नशा माफिया और कबाड़ माफिया को संरक्षण देने की चर्चाएं भी लगातार सामने आती रही हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके आरक्षक अजीत उपाध्याय थाना प्रभारी विद्या बारिधि तिवारी के बेहद करीब हैं और थाना प्रभारी को अपना गुरु मानते हैं। कहीं यही वजह तो नहीं कि तबादले के बाद भी अजीत उपाध्याय बार-बार गढ़वा थाने में वापस पहुंच जाते हैं? अगर क्षेत्र में इनकी फीडबैक की बात की जाए तो स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग इनके कार्यप्रणाली से परेशान और प्रताड़ित हैं। कई बार शिकायतें भी हुईं, लेकिन कार्रवाई हमेशा अधूरी ही क्यों रह जाती है? आखिर शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं होती, के पुलिस अधीक्षक श्री सियाज के.एम. से उम्मीद है कि गढ़वा थाने में वर्षों से जमे आरक्षकों की पदस्थगी, तबादले के बाद दोबारा वापसी, सिविल ड्रेस में ड्यूटी करने और इनके विरुद्ध सामने आ रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी आरक्षक अजीत उपाध्याय और नवीन सिंह को गढ़वा थाने से हटाया जाए और इन्हें प्रशिक्षण दिया जाए। इन्हें यह समझाया जाए कि मध्य प्रदेश शासन ने पुलिसकर्मियों को वर्दी इसलिए दी है कि वह ड्यूटी के दौरान वर्दी पहनें, घर की खूंटी पर टांगने के लिए नहीं। ड्यूटी के दौरान सिविल ड्रेस में घूमकर पुलिसिंग करने का अधिकार किस नियम के तहत दिया गया है, इसका जवाब भी पुलिस विभाग को देना चाहिए अब देखना यह है कि जिले के पुलिस अधीक्षक श्री सियाज के.एम. इन शिकायतों और आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या गढ़वा थाने में वर्षों से जमे आरक्षकों को हटाया जाएगा या फिर इसी तरह उनकी ‘लंबी पारी’ जारी रहेगी













