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चेक बुक किसके पास? कर्मचारी क्यों परेशान सिटी कार एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

किससे कहें, जब सिस्टम ही ढीला हो?’ सिटी कार एजेंसी के कर्मचारियों ने मांगी निष्पक्ष जांच

सिंगरौली। जिले के बैढ़न सहित अन्य क्षेत्रों में संचालित सिटी कार एजेंसियों में कार्यरत कर्मचारियों से चेक अथवा चेक बुक जमा कराने और बाद में उसके कथित उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कर्मचारियों का आरोप है कि एजेंसी में कार्यरत अधिकारियों द्वारा नौकरी के दौरान उनसे चेक जमा कराए जाते हैं। बाद में अधिकारी और कर्मचारी के बीच किसी प्रकार का विवाद या व्यक्तिगत मतभेद होने पर उन्हीं चेकों का कथित रूप से इस्तेमाल कर कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान किया जाता है।
कर्मचारियों का आरोप है कि कुछ मामलों में जमा कराए गए चेकों को बैंक में प्रस्तुत कराकर बाउंस कराया गया और इसके बाद कर्मचारियों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के कारण वे लंबे समय से मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। कई कर्मचारी अपनी समस्या लेकर लगातार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिल सकी है कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी से चेक लिया जाता है तो उसका स्पष्ट उद्देश्य, लिखित प्रक्रिया और पूरा रिकॉर्ड होना चाहिए। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कर्मचारी से चेक किस कारण से लिया गया, उसे कितने समय तक रखा गया और किस परिस्थिति में बैंक में प्रस्तुत किया गया। यदि किसी कर्मचारी ने वास्तविक वित्तीय लेनदेन के तहत चेक जारी किया है तो यह अलग कानूनी विषय है, लेकिन यदि नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी से चेक लिया गया और बाद में व्यक्तिगत विवाद या रंजिश के चलते उसका उपयोग किया गया, तो यह गंभीर जांच का विषय बनता है पीड़ित कर्मचारियों का कहना है कि निजी संस्थानों में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी अपनी नौकरी पर निर्भर होते हैं। ऐसे में अधिकारी और कर्मचारी के बीच विवाद होने पर कर्मचारी खुलकर अपनी बात रखने से भी डरते हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में इसी परिस्थिति का फायदा उठाकर कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता है। एक ओर नौकरी जाने का डर रहता है तो दूसरी ओर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है मामले में कर्मचारियों से जमा कराए गए चेकों का रिकॉर्ड, बैंक में प्रस्तुत किए गए चेक, चेक बाउंस होने के कारण और उसके बाद की गई कार्रवाई की जांच की मांग की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कर्मचारियों से चेक या चेक बुक जमा कराने की प्रक्रिया क्या है? क्या इसके लिए कोई लिखित नियम है? क्या चेक लेने के बाद कर्मचारी को उसकी जानकारी दी जाती है? क्या चेक वापस करने का कोई रिकॉर्ड रखा जाता है? और यदि किसी कर्मचारी से लिया गया चेक बाद में बैंक में प्रस्तुत किया गया तो उसका आधार क्या था? इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकता है मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को चाहिए कि कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि आरोप गलत हैं तो स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि किसी कर्मचारी के चेक का गलत इस्तेमाल कर उसे व्यक्तिगत विवाद के चलते परेशान किया गया है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी पीड़ा लेकर लगातार कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उनका सवाल है कि जब किसी कर्मचारी के साथ अन्याय हो तो वह अपनी शिकायत किसके सामने रखे? यदि शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं होगी तो कर्मचारियों का मानसिक और आर्थिक शोषण बढ़ता जाएगा अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में कब संज्ञान लेते हैं और सिटी कार एजेंसियों में कर्मचारियों से चेक जमा कराने तथा उनके कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कब शुरू होती है।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

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