सिंगरौली शिक्षा विभाग में नया विवाद: DEO के आदेश पर सरकारी स्कूलों में पत्रकारों की एंट्री पर रोक, उठे कई सवाल
सिंगरौली शिक्षा विभाग में नया विवाद: DEO के आदेश पर सरकारी स्कूलों में पत्रकारों की एंट्री पर रोक, उठे कई सवाल

सिंगरौली : जिले में नवागत जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा जारी एक आदेश के बाद शिक्षा विभाग में नया विवाद खड़ा हो गया है जारी आदेश के अनुसार अब सरकारी विद्यालय परिसरों में पत्रकारों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की बात सामने आई है आदेश के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और कई सवाल खड़े होने लगे हैं जानकारी के अनुसार आदेश में विद्यालयों के भीतर बाहरी व्यक्तियों, विशेषकर मीडिया प्रतिनिधियों के प्रवेश को नियंत्रित करने की बात कही गई है। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर पत्रकारों और आम नागरिकों के बीच नाराजगी देखी जा रही है
आदेश के बाद उठ रहे ये बड़े सवाल …… जिले में पहले भी कई बार सरकारी स्कूलों से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं, जिनमें शिक्षकों की अनुपस्थिति, विद्यालय समय में लापरवाही, अव्यवस्था और मिड-डे मील व्यवस्था में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। कई मामलों में मीडिया द्वारा मौके पर पहुंचकर ऐसी स्थितियों को उजागर किया गया ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि विद्यालयों की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं तो मीडिया की एंट्री सीमित करने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि मीडिया समाज और प्रशासन के बीच पारदर्शिता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे आदेश से सरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली पर निगरानी प्रभावित हो सकती है पारदर्शिता बनाम प्रतिबंध की बहस एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, डिजिटल इंडिया और निपुण भारत जैसे अभियानों के जरिए पारदर्शिता बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के आदेश को लेकर विरोधाभास की स्थिति बनती दिखाई दे रही है मामले को लेकर अब शिक्षा विभाग और प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ व्यवस्थित है तो जांच और निगरानी से परहेज क्यों?
जनता की नजर अब प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर
फिलहाल यह आदेश जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस विवाद पर क्या स्पष्टीकरण देता है।
यह संस्करण तेज लेकिन मानहानि/सीधे आरोपों से बचते हुए अखबार जैसी प्रोफेशनल भाषा में है, जैसा दैनिक भास्कर या बड़े हिंदी समाचार पत्र इस्तेमाल करते हैं।













