थाना से महिला थाना, फिर एसपी कार्यालय… आखिर आदिवासी महिला की शिकायत पर कार्रवाई कब?
थाना से महिला थाना, फिर एसपी कार्यालय... आखिर आदिवासी महिला की शिकायत पर कार्रवाई कब?

कटनी : जिले की जनपद पंचायत बड़वारा अंतर्गत ग्राम पंचायत पठरा से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक आदिवासी महिला ने वर्तमान सरपंच अशोक सिंह गौड़ पर छेड़छाड़ तथा गलत नीयत से घर में प्रवेश करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है पीड़ित महिला का आरोप है कि घटना उस समय हुई जब वह घर पर अकेली थी। महिला के अनुसार सरपंच ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उसके साथ अनुचित व्यवहार करने तथा छेड़छाड़ करने का प्रयास किया। महिला का कहना है कि उसने किसी तरह शोर मचाकर और विरोध कर स्वयं को आरोपी के चंगुल से बचाया घटना के बाद पीड़िता न्याय की उम्मीद लेकर बड़वारा थाना पहुंची, लेकिन उसके अनुसार वहां उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। महिला ने बताया कि उसे महिला थाना जाने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया। इसके बाद वह अपनी मां के साथ महिला थाना पहुंची, जहां भी उसकी शिकायत को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया न्याय की आस में पीड़िता अंततः पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची और लिखित शिकायत सौंपकर मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की। महिला का कहना है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय से उसे पुनः महिला थाना जाकर शिकायत दर्ज कराने की बात कही गई, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल पाया है मामले में उस समय नया मोड़ सामने आया जब गांव में हुई एक अलग मारपीट की घटना में सरपंच के घायल होने की जानकारी सामने आई। पीड़िता का आरोप है कि छेड़छाड़ की शिकायत के बाद गांव में कुछ लोगों और सरपंच के बीच विवाद हुआ था, लेकिन उस घटना से उसके पति का कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद पुलिस उसके पति को मारपीट के मामले में शामिल करने का प्रयास कर रही है पीड़ित महिला के पति ने दावा किया कि घटना वाले दिन वह गांव में मौजूद नहीं था, बल्कि निजी कार्य से जबलपुर गया हुआ था। उसका कहना है कि मोबाइल लोकेशन, यात्रा संबंधी रिकॉर्ड और जबलपुर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए, जिससे सच्चाई सामने आ सके। उसने आरोप लगाया कि उसे अनावश्यक रूप से मामले में घसीटा जा रहा है ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि सरपंच पर पूर्व में भी शराब के नशे में विवाद और अभद्र व्यवहार के आरोप लगते रहे हैं हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है अब क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि एक महिला अपनी शिकायत लेकर थाना, महिला थाना और पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच रही है, तो उसे न्याय मिलने में देरी क्यों हो रही है? क्या मामले की जांच पूरी निष्पक्षता से की जा रही है या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव की आशंका है? ये सवाल अब क्षेत्रीय चर्चाओं का विषय बने हुए हैं फिलहाल मामले की सत्यता और लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं थाने से महिला थाना और महिला थाना से एसपी कार्यालय तक पहुंची पीड़िता… आखिर कब मिलेगी न्याय की राह? ग्राम पंचायत पठरा में लगे गंभीर आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।












