खबरमध्य प्रदेशसिंगरौली

NTPC विंध्यनगर परियोजना में मजदूरों ने लगाए गंभीर आरोप, भुगतान अनियमितता और श्रमिक शोषण की शिकायत से मचा हड़कंप

NTPC विंध्यनगर परियोजना में मजदूरों ने लगाए गंभीर आरोप, भुगतान अनियमितता और श्रमिक शोषण की शिकायत से मचा हड़कंप

सिंगरौली/बैढ़न। जिले की प्रतिष्ठित औद्योगिक इकाई NTPC Limited विंध्यनगर परियोजना एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में आ गई है। परियोजना क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के एक समूह ने कार्यकारी निदेशक को लिखित शिकायत सौंपते हुए ठेकेदारी व्यवस्था के भीतर व्यापक स्तर पर मजदूरी भुगतान में अनियमितता, श्रमिक शोषण, सुविधाओं में कटौती तथा शिकायत करने पर नौकरी से हटाने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत सामने आने के बाद प्रबंधन व्यवस्था और श्रमिक हितों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं श्रमिकों द्वारा प्रस्तुत आवेदन के अनुसार, वे लंबे समय से एनटीपीसी विंध्यनगर के एमजीआर ट्रैक हाइपर क्षेत्र में कोयला सफाई कार्य में लगे हुए हैं। पूर्व में यह कार्य पूजा एसोसिएट्स नामक एजेंसी के अधीन संचालित था, जिसका अनुबंध 15 मार्च 2026 को समाप्त हो गया। इसके बाद 16 मार्च 2026 से यह कार्य नए ठेकेदार आर.एस. तिवारी को सौंपा गया। मजदूरों का आरोप है कि ठेका बदलने के बाद से कार्य व्यवस्था में पारदर्शिता समाप्त हो गई और आर्थिक अनियमितताएं बढ़ने लगीं शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि पूर्व ठेकेदार पूजा एसोसिएट्स के कार्यकाल के दौरान लगभग 27 माह तक मजदूरों ने नियमित कार्य किया, लेकिन भुगतान प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई। श्रमिकों का कहना है कि उनके वास्तविक कार्य दिवसों और तय भुगतान के अनुरूप राशि उनके बैंक खातों में नहीं पहुंची। आरोप लगाया गया है कि मजदूरी का भुगतान जानबूझकर कम किया गया, जिससे श्रमिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। मजदूरों ने इस पूरे भुगतान रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक बकाया राशि दिलाने की मांग की है नए ठेकेदार के कार्यभार संभालने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्य अनुबंध और दस्तावेजों में जिन आवश्यक सुविधाओं एवं संसाधनों का उल्लेख किया गया, वे आज तक मजदूरों को उपलब्ध नहीं कराए गए। जब इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से चर्चा की गई तो कथित तौर पर यह कहकर मामला टाल दिया गया कि ठेका कम दर पर लिया गया है, इसलिए अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं है मजदूरों ने भुगतान प्रक्रिया में एक और गंभीर विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि बैंक खातों में जो भुगतान राशि भेजी जाती है और कार्यालय में प्रदर्शित भुगतान विवरण (पेमेंट शीट) में दर्ज राशि, दोनों में अंतर दिखाई देता है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है शिकायत में यह भी कहा गया है कि श्रमिकों को महीने भर में केवल 14 से 15 दिन की ड्यूटी दी जा रही है, जबकि कार्य की उपलब्धता अधिक है। इसके बावजूद कई श्रमिकों को जानबूझकर सीमित कार्य देकर उनकी आय प्रभावित की जा रही है। श्रमिकों का दावा है कि संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया आवेदन में श्रमिकों ने अन्य सुविधाओं में भी वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि श्रमिक हित में निर्धारित कुछ मदों में भी पूरी राशि नहीं दी जा रही। इससे यह आशंका गहराती है कि श्रमिक कल्याण से जुड़ी सुविधाओं और भुगतानों में भी कटौती की जा रही है सबसे चिंताजनक आरोप यह है कि जब कोई मजदूर इन अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाता है या शिकायत करने की बात करता है तो संबंधित जिम्मेदारों द्वारा उसे नौकरी से निकालने की चेतावनी दी जाती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे पिछले 14 वर्षों से परियोजना से जुड़े हुए हैं, लेकिन अब अपने अधिकारों की बात करने पर उन्हें कार्य से हटाने की धमकी दी जा रही है 27 जून 2026 को बैढ़न से प्रस्तुत इस शिकायत पत्र पर 17 श्रमिकों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। सभी ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा जिन मजदूरों के भुगतान में कटौती या अन्य प्रकार की आर्थिक अनियमितता हुई है, उनकी राशि सीधे उनके बैंक खातों में सुनिश्चित कराई जाए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि देश की प्रमुख ऊर्जा कंपनी NTPC Limited जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था में यदि श्रमिक स्वयं लिखित रूप से भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ी और शोषण जैसे आरोप लगा रहे हैं, तो यह न केवल ठेकेदारी व्यवस्था बल्कि निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है अब देखना होगा कि एनटीपीसी प्रबंधन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या श्रमिकों की शिकायत पर निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है या मामला केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

anokhikalpana

अजय शर्मा | प्रधान संपादक

✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button