NTPC के आवासों में राजनीतिक कब्ज़ा? DPS से NTPC तक… आखिर किसका संरक्षण, किसका खेल
आवास किसके नाम, रह कौन रहा? NTPC में अब खुलेंगे संरक्षण के बड़े राज़

आवास किसके नाम, रह कौन रहा? NTPC में अब खुलेंगे संरक्षण के बड़े राज़
सिंगरौली : NTPC विंध्यनगर में अब केवल कर्मचारियों के लिए आवंटित आवासों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि पूरे सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने लगे हैं कर्मचारियों के लिए बने कुछ आवासों का उपयोग कथित रूप से नियमों के विपरीत किया जा रहा है आरोप हैं कि कुछ बाहरी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को भी इन आवासों में रहने की सुविधा दी गई यदि यह सही है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह सब वर्षों से चलता रहा? वर्ष 2026 के उपचुनाव के बाद NTPC टाउनशिप की राजनीतिक तस्वीर बदल गई इसके बाद लगातार यह चर्चा तेज हुई कि कुछ प्रभावशाली लोग सत्ता का समीकरण बदलने की तैयारी में जुट गए स्थानीय लोगों का आरोप है कि NTPC प्रबंधन से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है प्रणव वर्मा और कामना शर्मा के नाम भी सामने आ रहे हैं यदि इन आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि सार्वजनिक संस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न है यदि केंद्रीय स्तर की स्वतंत्र एजेंसी आवास आवंटन, रिकॉर्ड, कब्जे और पात्रता की जांच कर ले, तो कई ऐसे नाम सामने आ सकते हैं जिन्होंने वर्षों से व्यवस्था को अपने प्रभाव में रखा अब मांग उठ रही है कि बिना किसी दबाव के पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके यदि आरोप गलत हैं तो संबंधित लोगों को क्लीन चिट मिले, लेकिन यदि अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई हो उधर DPS विंध्यनगर को लेकर भी सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। खबर सामने आने के बाद कई शिक्षक, कर्मचारी, अभिभावक और पूर्व छात्र संपर्क कर रहे हैं उनका दावा है कि वर्षों से कई लोग खुलकर अपनी बात नहीं रख पाए उनका कहना है कि जब तक वर्तमान प्राचार्य प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते रहेंगे, तब तक कोई भी निर्भीक होकर अपनी बात रखने की स्थिति में नहीं होगा इसलिए जांच अवधि के दौरान उन्हें प्रशासनिक कार्यों से अलग कर स्वतंत्र टीम द्वारा गोपनीय तरीके से बयान दर्ज किए जाने चाहिए विद्यालय में आवास आवंटन, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, वर्ष 2012 से लगातार एक ही प्राचार्य के पद पर बने रहने, सेवानिवृत्ति के बाद सेवा जारी रहने को लेकर स्पष्टता, परीक्षाओं के दौरान कथित नकल, वायरल CCTV फुटेज तथा विद्यालय की कोऑर्डिनेटर कामना शर्मा के पुत्र को कथित अनुचित लाभ पहुंचाने जैसे आरोप भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके अब सवाल केवल एक प्राचार्य या कुछ अधिकारियों का नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता का है यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो जांच सभी आरोपों को स्वतः समाप्त कर देगी, लेकिन यदि कहीं भी नियमों की अनदेखी हुई है तो फिर चाहे पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून के अनुसार कार्रवाई होना ही जनता की सबसे बड़ी अपेक्षा है अब निगाहें इस बात पर हैं कि सच सामने आएगा या फिर ये सवाल भी फाइलों में दबा दिए जाएंगे यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि TTS-158, NH1-B टाइप-194 तथा NH3-A टाइप-17 आवासों में कथित रूप से राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को रहने की सुविधा दी गई है, जबकि इन आवासों का आधिकारिक आवंटन किसी अन्य कर्मचारी के नाम पर बताया जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह गंभीर जांच का विषय है कि वास्तविक आवंटी कौन है, वर्तमान में वहां कौन रह रहा है, किसकी अनुमति से रह रहा है और क्या यह NTPC के आवास आवंटन नियमों के अनुरूप है इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कर सच्चाई सार्वजनिक की जानी चाहिए
शेष अगले अंक में…













