DPS विंध्यनगर में आखिर किसका संरक्षण? सवालों के घेरे में पूरा प्रबंधन
DPS विंध्यनगर में आखिर कौन बचा रहा है किसे? अब होगा बड़े राज़ों का खुलासा?

सिंगरौली : खबर सामने आने के बाद जैसे-जैसे मामला लोगों तक पहुंचा, वैसे-वैसे चौंकाने वाले दावे सामने आने लगे फोन लगातार बज रहे हैं, लोग मिलने की बात कर रहे हैं और कई लोग कह रहे हैं कि अब उन्हें उम्मीद जगी है कि वर्षों से दबे मामलों की निष्पक्ष जांच हो सकती है विद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी, छात्र और अभिभावक वर्षों से खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं जब तक वर्तमान प्राचार्य जनार्दन पांडे पद पर बने रहेंगे, तब तक कोई भी व्यक्ति निर्भीक होकर सच बोलने की स्थिति में नहीं होगा उनका कहना है कि यदि वास्तव में सच्चाई सामने लानी है तो जांच अवधि के दौरान प्राचार्य को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग कर केंद्रीय स्तर की स्वतंत्र टीम द्वारा विद्यालय परिसर में गोपनीय तरीके से शिक्षकों, कर्मचारियों और अभिभावकों के बयान दर्ज किए जाएं। उनका दावा है कि ऐसा होते ही कई ऐसे राज सामने आ सकते हैं, जो अब तक दबे हुए हैं इतना ही नहीं, विद्यालय से जुड़े आवासों के आवंटन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ आवासों का उपयोग कथित रूप से नियमों के विपरीत किया जा रहा है। यदि यह सही है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि किसके संरक्षण में यह सब होता रहा और जिम्मेदारी किसकी है इसी बीच वर्ष 2012 से लेकर आज दिनांक 4 अगस्त 2026 तक DPS दिल्ली पब्लिक स्कूल, विंध्यनगर के प्राचार्य जनार्दन पांडे लगातार पद पर बने हुए हैं। इस दौरान न तो उनका स्थानांतरण हुआ और न ही 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद उनकी सेवाओं को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की गई। कुछ लोगों का कहना है कि उनका सेवानिवृत्ति का समय पूरा हो चुका है, फिर भी उन्हें सेवा में बनाए रखा गया। यदि ऐसा है, तो इसका स्पष्ट कारण सार्वजनिक होना चाहिए परीक्षाओं के दौरान कथित नकल, वायरल सीसीटीवी फुटेज और विद्यालय की कोऑर्डिनेटर कामना शर्मा के पुत्र को कथित रूप से अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप भी चर्चा में रहे हैं। यदि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है, तो स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा। लेकिन यदि अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या NTPC प्रबंधन के संरक्षण में यह पूरा तंत्र चलता रहा? यह भी चर्चा है कि NTPC से जुड़े एक अधिकारी का पुत्र इसी विद्यालय में अध्ययनरत है। यदि हितों के टकराव (Conflict of Interest) की आशंका व्यक्त की जा रही है, तो उसे दूर करने का एकमात्र रास्ता निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच है अब सवाल केवल एक प्राचार्य का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता का है। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो जांच से सभी आरोप स्वतः समाप्त हो जाएंगे। लेकिन यदि कहीं भी नियमों की अनदेखी हुई है, तो चाहे पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए बच्चों के भविष्य से बड़ा कोई पद नहीं, शिक्षा से बड़ा कोई प्रभाव नहीं और सच्चाई से बड़ा कोई संरक्षण नहीं हो सकता। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच होती है या सवालों को फिर से फाइलों में दफना दिया जाता हैं
शेष अगले अंक में…













