PVC एवं NTPC विंध्याचल ED को पत्र भेजकर 10 बिंदुओं पर मांगा जवाब, CCTV फुटेज से लेकर पदोन्नति तक सिर्फ सवाल?
40 वर्षों की शैक्षणिक विरासत पर सवालों की छाया, कथित सामूहिक नकल से लेकर CCTV फुटेज, छात्र की शिकायत, पदोन्नति और प्रशासनिक विवादों तक 10 बिंदुओं पर मांगा जवाब

सिंगरौली : DPS विंध्यनगर अपनी चार दशक लंबी शैक्षणिक यात्रा पूरी कर 41वें स्थापना दिवस के पड़ाव पर पहुंच गया है। चार दशकों से अधिक समय से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाली इस संस्था ने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा देकर उनके भविष्य को नई दिशा दी है। लेकिन विद्यालय के 41वें स्थापना दिवस के बीच परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवालों ने एक बार फिर DPS विंध्यनगर को चर्चा के केंद्र में ला दिया है विद्यालय में परीक्षा के दौरान कथित सामूहिक नकल, CCTV फुटेज, छात्र की शिकायत, संबंधित शिक्षकों की भूमिका, पदोन्नति, प्रशासनिक विवादों और अन्य शिकायतों को लेकर प्रियंशु पांडेय ने DPS विंध्यनगर के PVC एवं NTPC विंध्याचल के ED श्री किशोर कुमार होता को विस्तृत पत्र भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की है पत्र में कहा गया है कि DPS विंध्यनगर अपनी 40 वर्षों की उत्कृष्ट शैक्षणिक विरासत और प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता है। ऐसे में हाल के विवादों और परीक्षा संबंधी आरोपों को हल्के में लेने के बजाय उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि आरोप गलत हैं तो स्वतंत्र जांच के माध्यम से उनकी सच्चाई सामने आनी चाहिए और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए पत्र में Physics Board Practical Examination के दौरान श्री अमित कुमार से संबंधित कथित सामूहिक नकल के वीडियो, CCTV फुटेज एवं शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि संबंधित सामग्री CBSE, DPS Society और NTPC Management तक पहुंचाई जा चुकी है तथा सोशल मीडिया पर भी प्रसारित होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद अब तक स्वतंत्र जांच समिति गठित नहीं किए जाने पर सवाल खड़ा किया गया है सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि जब परीक्षा से संबंधित कथित वीडियो, CCTV फुटेज और शिकायतें संबंधित संस्थाओं के संज्ञान में लाई जा चुकी थीं, तो फिर इस मामले की स्वतंत्र जांच के लिए समिति का गठन अब तक क्यों नहीं किया गया? शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई में देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी है और क्या इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा की गई है? पत्र में परीक्षा कक्ष 12-B, 12-C एवं 12-D की CCTV फुटेज को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। मांग की गई है कि इन परीक्षा कक्षों की पूरी CCTV रिकॉर्डिंग का स्वतंत्र रूप से परीक्षण कराया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि परीक्षा के दौरान की संपूर्ण फुटेज सुरक्षित रखी गई है या नहीं किसी परीक्षा में अनियमितता का आरोप सामने आने के बाद CCTV फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है। ऐसे में यदि संबंधित कक्षों की फुटेज उपलब्ध है तो उसका स्वतंत्र परीक्षण कराना पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वहीं यदि फुटेज सुरक्षित नहीं है तो यह अपने आप में एक गंभीर प्रशासनिक प्रश्न बन सकता है कि परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी थी पत्र में कक्षा 12 के छात्र अक्षित कुमार द्वारा परीक्षा के दिन की गई शिकायत और CCTV फुटेज के सत्यापन की मांग का भी उल्लेख किया गया है। सवाल उठाया गया है कि छात्र की शिकायत पर विद्यालय प्रबंधन द्वारा क्या कार्रवाई की गई? क्या शिकायत को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया? क्या CCTV फुटेज का परीक्षण किया गया? यदि शिकायत पर जांच नहीं हुई तो छात्र की शिकायत को नजरअंदाज करने के लिए कौन जिम्मेदार है? मामले में प्रधानाचार्य डॉ. जनार्दन पांडेय द्वारा CBSE को दी गई कथित “Mock Test” संबंधी व्याख्या पर भी सवाल उठाए गए हैं। पत्र में पूछा गया है कि जब संबंधित वीडियो और अन्य सामग्री बाद में सार्वजनिक रूप से सामने आई, तो क्या उस व्याख्या की दोबारा समीक्षा की गई? यदि समीक्षा नहीं हुई तो उपलब्ध सामग्री के आधार पर आगे सत्यापन अथवा सुधारात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? पत्र में श्री अमित कुमार को Headmaster पद पर Promotion Letter दिए जाने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायतकर्ता ने पूछा है कि जब संबंधित शिक्षक के संबंध में शिकायतें और जांच की मांग लंबित होने की बात कही जा रही थी, तब किस आधार पर पदोन्नति का निर्णय लिया गया क्या पदोन्नति से पहले सभी शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों की समीक्षा की गई थी? क्या NTPC Management को पूरे मामले की जानकारी दी गई थी? क्या पदोन्नति से पहले प्रबंधन की स्वीकृति प्राप्त की गई थी? इन सवालों का स्पष्ट जवाब मांगा गया है पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर शिकायत लंबित हो और उसी अवधि में उसके संबंध में महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया जाए, तो उस निर्णय की प्रक्रिया और आधार को पारदर्शी होना चाहिए। इसलिए संबंधित दस्तावेजों और निर्णय प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की गई है इसके अलावा प्रधानाचार्य डॉ. जनार्दन पांडेय के कार्यकाल के दौरान सामने आए विभिन्न विवादों, शिकायतों और कथित रूप से 10 से अधिक न्यायालयीन मामलों का भी उल्लेख पत्र में किया गया है। मांग की गई है कि DPS Society एवं NTPC Management द्वारा उनके पूरे कार्यकाल की स्वतंत्र प्रशासनिक समीक्षा कराई जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि विवादों के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे और शिकायतों के निस्तारण में कहीं कोई प्रशासनिक कमी तो नहीं रही पत्र में पूर्व Headmaster नवीन सिन्हा की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणिकता को लेकर की गई शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। पत्र में दावा किया गया है कि संबंधित विश्वविद्यालय द्वारा दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है और इस संबंध में पुलिस अधिकारियों के समक्ष भी शिकायत की गई है। हालांकि, इन दावों की अंतिम पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और सक्षम जांच के माध्यम से ही हो सकती है। इसी कारण मामले में स्वतंत्र सत्यापन की मांग की गई है वहीं प्रधानाचार्य डॉ. जनार्दन पांडेय एवं सुश्री गरिमा तिवारी से संबंधित कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के वीडियो एवं शिकायतों का भी पत्र में उल्लेख किया गया है। इन शिकायतों में श्रीमती आर.डी. शर्मा (HOHR), श्रीमती कामना शर्मा (AGM-HR) जैसे अधिकारियों के संबंध में कथित टिप्पणियों का जिक्र किया गया है पत्र में सवाल किया गया है कि यदि इस प्रकार की शिकायतें और रिकॉर्डिंग संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई हैं तो क्या इनकी स्वतंत्र जांच की गई? यदि जांच नहीं हुई तो कब तक जांच होगी और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाएगी? इन तमाम सवालों के बीच पत्र में केवल वर्तमान विवादों की जांच की मांग नहीं की गई है, बल्कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी ठोस व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। इसमें परीक्षा के दौरान CCTV फुटेज को अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखने, स्वतंत्र परीक्षा ऑडिट कराने तथा गंभीर शिकायतों के लिए समयबद्ध एवं स्वतंत्र शिकायत निवारण व्यवस्था लागू करने की मांग शामिल है शिकायतकर्ता का कहना है कि किसी भी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था में विद्यार्थियों का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है। परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने के बाद यदि शिकायतों की स्वतंत्र जांच होती है तो इससे संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता और मजबूत हो सकती है। वहीं यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से उन्हें भी स्पष्ट किया जा सकता है DPS विंध्यनगर की स्थापना को चार दशक से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान संस्था ने अनेक विद्यार्थियों को शिक्षा देकर देश और समाज में योगदान देने का अवसर दिया है। यही वजह है कि वर्तमान विवादों को केवल एक सामान्य शिकायत के रूप में नहीं देखा जा सकता। मामला विद्यार्थियों के भविष्य, अभिभावकों के विश्वास और संस्था की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है पत्र के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को पहले से दोषी ठहराना नहीं है। मांग सिर्फ इतनी है कि सामने आए आरोपों, शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हो और जांच के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि DPS विंध्यनगर के 41वें स्थापना दिवस के मौके पर उठाए गए इन गंभीर सवालों पर DPS Society और NTPC Management का रुख क्या रहेगा? क्या कथित सामूहिक नकल के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए समिति गठित की जाएगी? क्या 12-B, 12-C और 12-D की CCTV फुटेज का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाएगा? क्या छात्र अक्षित कुमार की शिकायत पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आएगा? क्या पदोन्नति से जुड़े निर्णय की समीक्षा होगी? और क्या प्रधानाचार्य के पूरे कार्यकाल के दौरान सामने आए विवादों एवं शिकायतों की स्वतंत्र प्रशासनिक समीक्षा कराई जाएगी? इन सवालों के जवाब अब केवल शिकायतकर्ता ही नहीं, बल्कि विद्यालय से जुड़े विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक और अन्य हितधारक भी जानना चाहते हैं एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था के लिए सबसे मजबूत जवाब उसकी पारदर्शिता होती है। यदि आरोप निराधार हैं तो जांच उन्हें स्पष्ट कर सकती है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर सुधार की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है इस पूरे मामले में अब निगाहें DPS Society और NTPC Management की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या 41वें स्थापना दिवस के अवसर पर संस्था अपने ऊपर उठ रहे सवालों का जवाब स्वतंत्र जांच के माध्यम से देगी, या ये सवाल आगे भी अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच चर्चा का विषय बने रहेंगे—यह आने वाला समय तय करेगा।













