हाईकोर्ट पर कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले में प्रचंड प्रहार’ के संचालक अमित तिवारी को बड़ा झटका, नियमित जमानत याचिका खारिज
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश बैढ़न ने कहा— प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप, जांच जारी होने और मामले की प्रकृति को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं।

बैढ़न (सिंगरौली)। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की गरिमा को कथित रूप से ठेस पहुंचाने वाले वीडियो के सोशल मीडिया प्रसारण से जुड़े बहुचर्चित मामले में सिंगरौली निवासी अमित कुमार तिवारी को बड़ा झटका लगा है। तृतीय अपर सत्र न्यायालय, बैढ़न ने आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री, आरोपों की गंभीरता और विवेचना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस स्तर पर आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाना उचित नहीं है न्यायालय ने यह आदेश 14 जुलाई 2026 को पारित किया प्रकरण की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र सोनी की अदालत में हुई। मामला थाना बैढ़न में दर्ज अपराध क्रमांक 859/2026 से संबंधित है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत अपराध दर्ज किया गया है अभियोजन के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो प्रसारित हुआ, जिसमें कथित रूप से मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की कार्यवाही और न्यायपालिका के संबंध में आपत्तिजनक एवं अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इस संबंध में उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद पुलिस को कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद थाना बैढ़न पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया सुनवाई के दौरान लोक अभियोजन ने अदालत में जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया। अभियोजन का यह भी तर्क था कि आरोपी के विरुद्ध प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं तथा जांच अभी जारी है। यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकता है। अभियोजन ने अदालत के समक्ष यह भी रखा कि आरोपी के विरुद्ध अन्य प्रकरण भी दर्ज हैं और उसका आपराधिक रिकॉर्ड भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि आरोपी निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी ने स्वयं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक सिंगरौली को शिकायत भेजकर उचित कार्रवाई की मांग की थी। यह भी कहा गया कि आरोपी ने न तो उक्त वीडियो बनाया और न ही उसका प्रसारण किया। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी का स्थायी निवास है, वह फरार होने वाला व्यक्ति नहीं है तथा जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है। इसलिए उसे नियमित जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने केस डायरी, विवेचना की प्रगति और उपलब्ध दस्तावेजों का विस्तार से अवलोकन किया। आदेश में उल्लेख किया गया कि विवेचना अभी जारी है तथा आरोपपत्र भी प्रस्तुत नहीं हुआ है। अदालत ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी के विरुद्ध गंभीर आरोप परिलक्षित होते हैं और मामले की प्रकृति सामान्य नहीं कही जा सकती। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में आरोपी के विरुद्ध पूर्व में दर्ज मामलों का भी उल्लेख किया गया, जिसे जमानत पर विचार करते समय ध्यान में रखा गया अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर प्रकृति के हैं, विवेचना अभी जारी है और उपलब्ध सामग्री के आधार पर इस स्तर पर आरोपी को जमानत देना उचित प्रतीत नहीं होता। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी अमित कुमार तिवारी की ओर से दायर नियमित जमानत आवेदन निरस्त कर दिया।













