सिंगरौली। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की अमलोरी एवं झिंगुरदा खदानों में कार्यरत ठेका कंपनी M/s कालींगा कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड (KCCL) के खनन कार्यों को लेकर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। अक्टूबर–दिसंबर 2025 की तिमाही के लिए Hindrance Hours की जाँच तथा मात्रा और लीड मापन के त्रैमासिक मिलान के दौरान कथित अनियमितताओं का मामला अब NCL के शीर्ष प्रबंधन तक पहुँच चुका है उपलब्ध दस्तावेज़ों एवं सूचनाओं के अनुसार, अमलोरी खदान के ईस्ट एवं वेस्ट पिट में अक्टूबर 2023 से अब तक KCCL द्वारा किए गए कार्यों की वास्तविक संचयी वेटेड औसत लीड 4 किलोमीटर से कम पाई गई है, जबकि कंपनी को 5.69 किलोमीटर की औसत लीड स्वीकृत है। इसके बावजूद आरोप है कि कार्य प्रारंभ होने के बाद से प्रत्येक माह लीड दूरी को जानबूझकर बढ़ाकर 5 किलोमीटर से अधिक दर्शाया गया, ताकि इसे अनुबंध में अनुमत ±10 प्रतिशत की सीमा के भीतर दिखाया जा सके इसी प्रकार, झिंगुरदा खदान में KCCL के लिए स्वीकृत वेटेड औसत लीड 3.89 किलोमीटर है, किंतु विगत लगभग दो वर्षों (2023–2025) से इसका भी समुचित अनुपालन नहीं किया गया। दस्तावेज़ों के अनुसार, कार्य प्रारंभ से अब तक वास्तविक संचयी औसत लीड मात्र लगभग 2.5 किलोमीटर रही है, जो स्वीकृत मान से लगभग 38 प्रतिशत कम है, जबकि अनुबंध शर्तों के अंतर्गत केवल 10 प्रतिशत तक के नकारात्मक विचलन की ही अनुमति है विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन तथ्यों की समय रहते निष्पक्ष एवं तकनीकी जाँच नहीं कराई गई, तो आगामी वर्ष अमलोहरी और झिंगुरदा खदानों में KCCL के टेंडर कार्य की समाप्ति एवं अंतिम बिलिंग के दौरान बड़ा विवाद उत्पन्न हो सकता है। इससे NCL को गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
अब सबसे अहम प्रश्न यह है कि—
क्या कंपनी के राजस्व को संभावित रूप से नुकसान पहुँचाने वाली इन कथित अनियमितताओं में संबंधित अधिकारियों, जैसे आशीष, विकास, आलोक चंद्र, आलोक कुमार (महाप्रबंधक, अमलोहरी) तथा राघवेंद्र प्रताप सिंह (महाप्रबंधक, मानव संसाधन) की भूमिका की भी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए?
या फिर यह पूरा मामला केवल कागज़ी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा?
सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण की स्वतंत्र तृतीय एजेंसी से जाँच, Hindrance Hours एवं लीड मापन की विस्तृत तकनीकी समीक्षा पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि NCL के CMD स्तर से एक उच्चस्तरीय जाँच समिति का गठन किया जाए, ताकि—
कंपनी के राजस्व के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ रोका जा सके,
अनुबंध शर्तों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो,
और सबसे महत्वपूर्ण, विस्थापितों एवं स्थानीय हितधारकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न होने पाए।













