कभी पुलिस से डरते थे अपराधी, आज दिनदहाड़े गोलियां चलाकर भाग रहे बदमाश कंचन ज्वेलर्स गोलीकांड के बाद अपराधी बेखौफ क्यों, पुलिस का खौफ कहां?
कंचन ज्वेलर्स गोलीकांड के बाद अपराधी बेखौफ क्यों, पुलिस का खौफ कहां?

सिंगरौली : एक समय था जब अपराधी अपराध करने से पहले 100 बार सोचते थे पुलिस को देखते ही अपराधी भाग जाते थे रात में जब पुलिस की पेट्रोलिंग होती थी और पुलिस के सायरन की आवाज सुनाई देती थी, तो अपराधी तो दूर की बात है, आम आदमी भी समझता था कि पुलिस शहर में है, हम सुरक्षित हैं मतलब उस समय सिंगरौली सुरक्षित था और लोग अपने आपको सुरक्षित महसूस करते थे चोरी, डकैती, लूट, हत्या, बलात्कार जैसे अपराधों को लेकर लोगों के अंदर एक डर था, लेकिन वह डर अपराधियों के अंदर पुलिस का था लेकिन आज की स्थिति क्या है? आज अपराधियों के अंदर से पुलिस का खौफ खत्म हो गया है अपराध करने से पहले अपराधी सोचते तक नहीं और अपराध करने के बाद इतनी आसानी से भागने में सफल हो जाते हैं, जिसकी कोई हद नहीं पुलिस के हजारों कैमरे लगे हैं, आखिर यह कैमरे किस काम के हैं? जब कोई बड़ी घटना होती है तो कहीं पुलिस के सीसीटीवी कैमरे खराब मिलते हैं, कहीं कैमरों पर धूल पड़ी रहती है, कहीं कैमरे बंद रहते हैं तो कहीं कैमरे होते ही नहीं हैं अगर शहर में हजारों कैमरे लगे हैं तो फिर अपराधी कैमरों के सामने अपराध करके इतनी आसानी से भाग कैसे जाते हैं? आज सिंगरौली में चोरी हो रही है, डकैती हो रही है, लूट हो रही है, हत्या हो रही है, बलात्कार के मामले सामने आ रहे हैं। अपराध आंखों के सामने हो रहा है, सीसीटीवी कैमरों के सामने हो रहा है और कई बार ऐसा लगता है कि पुलिस केवल मुख्यदर्शक बनकर खड़ी है घटना होने के बाद जांच शुरू होती है तीन महीने बीत जाते हैं, चार महीने बीत जाते हैं, कभी-कभी साल भर बीत जाता है, लेकिन अपराधी खुलेआम घूमते रहते हैं यह सवाल सिर्फ पुलिस से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से है आज मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में सिंगरौली में दिनदहाड़े चोरियां हो रही हैं दिनदहाड़े डकैती हो रही है चाहे महाराष्ट्र बैंक की घटना हो, जिले की अलग-अलग सोने-चांदी की दुकानों की घटनाएं हों या फिर घरों में चोरी और लूट की वारदातें आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं पहली बात तो अपराधी अपराध करने के बाद भागने में सफल हो जाते है जब कभी-कभार अपराधी पकड़े भी जाते हैं तो किसी नेता, मंत्री, विधायक या सांसद की सिफारिश का सहारा मिल जाता है? तो अपराध और ज्यादा बढ़ने लगते हैं क्योंकि अभी वर्तमान में तागिरी जनता की समस्या के समाधान के लिए नहीं बल्कि अब अपराध को बढ़ावा देने के लिए की जा रही आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर जहां भाजपा संगठन और प्रशासन से जुड़े लोग दीपक जलाकर कार्यक्रम कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर सिंगरौली में अपराधियों ने बंदूक से पटाखे फोड़ दिए जयंत मस्जिद मार्केट स्थित बजरंग कॉम्प्लेक्स में कंचन ज्वेलर्स की दुकान में दिनदहाड़े हथियारों के बल पर डकैती की वारदात को अंजाम देने की कोशिश की गई इस दौरान बीच में आने वाले लोगों पर गोली चलाई गई और दो लोगों के घायल,अस्पताल में इलाज चल रहा है और घटना को अंजाम देने के बाद अपराधी भागने में सफल हो गए दिनदहाड़े बाजार में हथियार लेकर अपराधी पहुंचते हैं, गोली चलाते हैं, लोगों को घायल करते हैं और फिर भाग जाते हैं तो आखिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था कहां थी? कहां थी पुलिस पेट्रोलिंग?कहां थे पुलिस के कैमरे? कहां था पुलिस का खौफ? यह सवाल सिंगरौली की जनता पूछ रही है पुलिस अधीक्षक श्री सियाज के. एम. एक अच्छे सुलझे हुए IPS अधिकारी हैं और इस गोलीकांड के बाद जिस प्रकार उन्होंने घटनास्थल पर पहुंचकर कई घंटे तक निरीक्षण किए अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए अपनी गोपनीय पुलिस टीम के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं पर सवाल है अगर जिले के कप्तान जिस प्रकार मेहनत कर रहे हैं, उसी प्रकार उनकी पूरी पुलिस टीम अपराध को अपराध की नजर से देखे, अपराधियों के खिलाफ गंभीरता से काम करे और किसी भी प्रकार के दबाव से ऊपर उठकर कानून के अनुसार कार्रवाई करे, तो शायद पुलिस कप्तान साहब को आधी रात को शहर में घूम-घूमकर पुलिसिंग की निगरानी करने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन धन्य हो यहां पुलिस टीम अपने ही अधिकारी का बात नहीं मानते कई पुराने उप, निरक्षक जिस थाने चौकी की खुशबू एक बार ले लिए दुबारा उस चौकी थाने से जाने का नाम ही नहीं लेते कभी कभार ट्रांसफर हुआ तो नेता मंत्री विधायक सांसद से सिफारिश करके पुनः उसी थाने चौकी में आकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं उदाहरण के लिए जिले की कई चौकिया है जिनमें आज भी थाना चौकी में रहने के बावजूद भी उसी थाने चौकी में सेवा दे रहे हैं तो अपराध तो पड़ेगा क्योंकि पुलिस लाइन में कई ऐसे पुलिसकर्मी है निरीक्षक है उपनिरीक्षक है जिनको अभी तक थाना चौकी नहीं मिला और पुराने लोग मलाई काट रहे हैं अपराध को खत्म करने की जिम्मेदारी लेकर अपराध को बढ़ा रहे हैं अपराधियों को संरक्षित कर रहे हैं
शेष अगले अंक में?













