प्रिंस गुप्ता, आशुतोष सिंह, गौरव सिंह की शराब दुकानों के सामने अराजकता चरम पर—सरकारी आदेशों की खुलेआम धज्जियां
सिंगरौली में शराब भट्टियों का ‘खुला खेल’: कलेक्ट्रेट के बगल जाम, कानून कागज़ पर—प्रशासन मौन क्यों?”

सिंगरौली (मध्य प्रदेश)
सिंगरौली जिले में कानून व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हालत यह है कि कलेक्ट्रेट कार्यालय के बगल चौराहे पर संचालित शराब भट्टी, जिसके संचालक प्रिंस गुप्ता बताए जा रहे हैं, वहां रोजाना अराजकता का खुला खेल देखने को मिलता है इतना ही नहीं, कुछ ही दूरी पर संचालित अन्य शराब दुकानों—जहां आशुतोष सिंह और गौरव सिंह का नाम सामने आता है—के बाहर भी यही हालात हैं। इन दुकानों के सामने अक्सर सड़क पर ही शराब पीते लोग, खड़ी गाड़ियां और जाम का नजारा आम बात बन चुका है मुख्य बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थित इन शराब भट्टियों के कारण आधी सड़क पर कब्जा हो जाता है। शराब खरीदने वालों की गाड़ियां सड़क पर ही खड़ी रहती हैं, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित होता है। राहगीरों, महिलाओं, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब शराब भट्टी के बगल में खुली दुकानों में खुलेआम “बैठकर शराब पीने” की पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। कुर्सी, पानी की बोतल और चखना—सब कुछ दिनदहाड़े दिया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि जब सुविधा खुलेआम मिल रही है, तो लोग सड़क किनारे शराब पीने से क्यों रुकेंगे? सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे, कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास हो रहा है—फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही मध्य प्रदेश शासन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन रोकने और अव्यवस्था पर सख्ती के स्पष्ट आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन सिंगरौली में ये आदेश महज कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं।
अब सवाल सीधा है—
क्या प्रशासन इन नामों और इन हालातों पर कार्रवाई करेगा?
क्या नियमों को ताक पर रखकर चल रही इस व्यवस्था पर रोक लगेगी?
या फिर सिंगरौली की जनता यूं ही जाम, अव्यवस्था और खुलेआम शराबखोरी के बीच जीने को मजबूर रहेगी?
जनता पूछ रही है—कलेक्ट्रेट के बगल ही अगर कानून बेबस है, तो बाकी जिले का क्या हाल होगा?
प्रशासन की चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल
सिंगरौली में जो दृश्य सामने आ रहे हैं, वे केवल अव्यवस्था नहीं बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयान कर रहे हैं। कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के पास यदि इस तरह खुलेआम नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो यह सीधे-सीधे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है। कभी-कभार दिखावे की कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ ही दिनों में हालात फिर जस के तस हो जाते हैं।
क्या यह मान लिया जाए कि जिम्मेदार विभाग—आबकारी, पुलिस और नगर प्रशासन—सभी ने आंखें मूंद ली हैं? या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत के चलते यह खेल बेरोकटोक जारी है?
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में……
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी इस पूरे मामले में संदिग्ध नजर आ रही है। जनता के बीच से चुनकर आए प्रतिनिधि आखिर इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं?
क्या उन्हें अपने क्षेत्र की सड़कों पर लगने वाले जाम, महिलाओं की असुरक्षा और युवाओं में फैल रही शराबखोरी दिखाई नहीं देती?
या फिर यह मान लिया जाए कि जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर मौन सहमति दे दी है?
जनता यह जानना चाहती है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब इस गंभीर समस्या पर बोलने से क्यों बच रहे हैं।
आम जनता का जीवन हुआ दूभर
इन शराब भट्टियों के कारण सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को उठानी पड़ रही है। रोजाना काम पर जाने वाले लोग जाम में फंसते हैं, स्कूली बच्चे असुरक्षित माहौल से गुजरते हैं, और महिलाएं असहज स्थिति का सामना करती हैं सड़क किनारे शराब पीते लोगों की भीड़ से न केवल माहौल खराब होता है, बल्कि कई बार विवाद और झगड़े की स्थिति भी बन जाती है। इससे आसपास के दुकानदार और स्थानीय निवासी भी दहशत में रहते हैं।
शासन के आदेश बनाम जमीनी हकीकत
एक तरफ मध्य प्रदेश शासन सख्त निर्देश जारी करता है कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, वहीं दूसरी तरफ सिंगरौली में इन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ती दिखाई दे रही हैं यह स्थिति केवल कानून के उल्लंघन की नहीं, बल्कि शासन की साख पर भी सीधा आघात है। अगर आदेशों का पालन ही नहीं होगा, तो फिर उन आदेशों का महत्व क्या रह जाएगा?
आखिर कब होगी ठोस कार्रवाई?
अब समय आ गया है कि शासन और प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले।
जरूरत है सख्त कार्रवाई की, जवाबदेही तय करने की और ऐसे संचालकों पर कड़ी कार्रवाई करने की जो नियमों को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं।
साथ ही, उन अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिनकी निगरानी में यह सब हो रहा है।
जनता का साफ संदेश
सिंगरौली की जनता अब खामोश रहने के मूड में नहीं है। लोग साफ तौर पर कह रहे हैं कि यदि जल्द ही इस व्यवस्था पर लगाम नहीं लगाई गई, तो जनआंदोलन की स्थिति बन सकती है क्योंकि सवाल सिर्फ जाम का नहीं है, सवाल है कानून के अस्तित्व का, प्रशासन की जिम्मेदारी का और समाज के भविष्य












