खबरमध्य प्रदेशसिंगरौली

स्थानांतरण के बाद हाईकोर्ट की शरण, गजानंद आखिर सिंगरौली क्यों नहीं छोड़ना चाहते?

तबादला रीवा, लेकिन दिल सिंगरौली में? गजानंद की कानूनी लड़ाई बनी चर्चा का विषय

सिंगरौली। जिले में एक प्रशासनिक मामला इन दिनों चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी अधिकारी गजानंद के सिंगरौली में बने रहने के प्रयासों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। प्रशासनिक गलियारों से लेकर कर्मचारियों के बीच तक यह सवाल लगातार उठाया जा रहा है कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि स्थानांतरण के बावजूद वे जिले को छोड़ने के बजाय यहीं बने रहने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले रहे हैं प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, 15 जून 2026 को सक्षम स्तर से जारी आदेश के तहत गजानंद का स्थानांतरण रीवा संभाग के क्षेत्रीय कार्यालय में किया गया था। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत स्थानांतरण के बाद संबंधित अधिकारी को नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होता है, लेकिन इस मामले में घटनाक्रम ने अलग मोड़ ले लिया बताया जाता है कि स्थानांतरण आदेश के बाद गजानंद ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान 24 जून 2026 को हाईकोर्ट ने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि अधिकारी द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर प्रचलित नियमों के अनुरूप विचार किया जाए तथा एक स्पष्ट, कारणयुक्त और विधिसम्मत आदेश पारित किया जाए। न्यायालय ने किसी प्रकार की अंतिम राहत देने के बजाय नियमानुसार निर्णय लेने की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए इसके बाद कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, सिंगरौली की ओर से भी संबंधित आवेदन पर नियमों के अनुरूप निर्णय लेने के निर्देश जारी किए गए। हालांकि इसके बावजूद पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है प्रशासनिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब स्थानांतरण आदेश प्रभावी है और नए पदस्थापना स्थल का निर्धारण हो चुका है, तब भी सिंगरौली में बने रहने की इतनी कोशिश आखिर क्यों की जा रही है? क्या इसके पीछे कोई विशेष प्रशासनिक कारण है, व्यक्तिगत परिस्थितियां हैं या फिर अन्य कोई वजह, जिसे लेकर लगातार कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है इधर, गजानंद के कार्यकाल को लेकर भी कई तरह की बातें सामने आ रही हैं कुछ कर्मचारियों एवं स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान कार्यालयीन वातावरण को लेकर असंतोष की स्थिति बनी रही। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कई कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ना और अनावश्यक दबाव का सामना करना पड़ा चर्चाओं में जिन कर्मचारियों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें दिनेश कुशवाहा, सुभाष विश्वकर्मा, तहसील कार्यालय के एक सहायक ग्रेड-3, अशोक श्रीवास्तव तथा खनिज विभाग के कुछ कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि कार्यकाल के दौरान उनके साथ व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर कई बार असंतोष व्यक्त किया गया था। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है सूत्रों का यह भी कहना है कि पूरे मामले पर कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चर्चा चल रही थी, लेकिन स्थानांतरण के बाद न्यायालय तक मामला पहुंचने से यह विषय एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सक्षम प्राधिकारी न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप क्या अंतिम निर्णय लेते हैं और आगे इस प्रकरण में क्या प्रशासनिक कार्रवाई होती है फिलहाल इतना तय है कि गजानंद का यह मामला केवल एक साधारण स्थानांतरण तक सीमित नहीं रह गया है। स्थानांतरण के बाद कानूनी प्रक्रिया, प्रशासनिक निर्देश और कर्मचारियों के आरोपों ने इसे जिले की चर्चित प्रशासनिक घटनाओं में शामिल कर दिया है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण पर होने वाला निर्णय न केवल संबंधित अधिकारी बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

anokhikalpana

अजय शर्मा | प्रधान संपादक

✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button