सिंगरौली में नशे का जहर: पढ़े-लिखे युवा से लेकर मासूम बच्चे तक चपेट में, प्रशासन मौन
सिंगरौली में नशे का जहर: पढ़े-लिखे युवा से लेकर मासूम बच्चे तक चपेट में, प्रशासन मौन
सिंगरौली (मध्य प्रदेश) — जिला सिंगरौली में नशा अब केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि एक भयावह संकट बन चुका है। गांजा, चरस, अफीम और हीरोइन जैसे नशीले पदार्थ गांव-गांव, गली-गली इतनी आसानी से उपलब्ध हैं, मानो यह किसी अवैध कारोबार का नहीं बल्कि खुले बाजार का हिस्सा हों चिंताजनक बात यह है कि आज इस नशे की चपेट में केवल बेरोजगार युवा ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे युवक और कम उम्र के बच्चे भी आ चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि स्कूल जाने की उम्र के बच्चे नशे के आदी हो रहे हैं, जो आने वाले समय के लिए एक भयानक संकेत है।
नशे की लत, अपराध की ओर पहला कदम ?
नशे की लत पूरी करने के लिए गरीब परिवारों के बच्चे और युवा चोरी, मारपीट और घरेलू हिंसा का रास्ता अपना रहे हैं। पैसे नहीं मिलने पर वे घर के बर्तन, अनाज, यहां तक कि कपड़े तक बेचने को मजबूर हैं। कई मामलों में नशे के आदी युवक परिवार के साथ मारपीट कर रहे हैं, जिससे घर-घर में तनाव और डर का माहौल है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की बिक्री आखिर किसकी शह पर हो रही है?
जिला प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर कभी-कभार खानापूर्ति जरूर होती है, लेकिन गांवों और मोहल्लों में खुलेआम बिक रहे नशे पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो नियमित छापेमारी होती है, न ही बड़े सप्लायरों पर शिकंजा कसा जाता है। नतीजा यह है कि नशे का कारोबार दिन-प्रतिदिन फलता-फूलता जा रहा है।
भविष्य अंधकार की ओर ?
अगर समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो सिंगरौली की एक पूरी पीढ़ी नशे की दलदल में हमेशा के लिए धंस सकती है।
अब जरूरत है सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त और ईमानदार कार्रवाई की।
प्रशासन को यह समझना होगा कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी को बचाने की लड़ाई है।













