कटनीखबरमध्य प्रदेश

“बसाड़ी मोड़ पर कानून बेबस: ऑटो चालकों का ‘गुंडाराज’, रोज़ाना जाम-झगड़ों से जनता हलकान, पुलिस व्यवस्था पर बड़ा सवाल”

“बसाड़ी मोड़ पर कानून बेबस: ऑटो चालकों का ‘गुंडाराज’, रोज़ाना जाम-झगड़ों से जनता हलकान, पुलिस व्यवस्था पर बड़ा सवाल”

संवाददाता: दिनेश पुरी गोस्वामी

कटनी जिले के बड़वारा थाना अंतर्गत आने वाला बसाड़ी मोड़ इन दिनों व्यवस्था नहीं, बल्कि अराजकता की पहचान बनता जा रहा है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि यहां सड़क पर चलना अब आम नागरिकों के लिए जोखिम भरा हो गया है। तीन पहिया ऑटो चालकों की मनमानी, दबंगई और आपसी टकराव ने इस चौराहे को “विवादों का स्थायी अड्डा” बना दिया है स्थानीय लोगों के मुताबिक, बसाड़ी मोड़ पर हर दिन सवारी बैठाने की होड़ में ऑटो चालकों के बीच जमकर गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और कई बार मारपीट तक हो जाती है चौराहे पर खड़े ऑटो चालक नियमों को ठेंगा दिखाते हुए सड़क के बीचों-बीच वाहन खड़ा कर देते हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। नतीजा—कुछ ही मिनटों में लंबा जाम, और फिर शुरू होता है अफरा-तफरी का खतरनाक खेल स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब इस जाम में स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस तक फंस जाती हैं। कई बार जरूरी सेवाओं के वाहन घंटों तक रास्ता नहीं बना पाते, जिससे किसी बड़ी अनहोनी की आशंका लगातार बनी रहती है।

जनता का सीधा आरोप:

स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि यह अव्यवस्था कोई नई नहीं है—महीनों से लगातार शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन प्रशासन और पुलिस की ओर से केवल खानापूर्ति की कार्रवाई ही देखने को मिली है। यही वजह है कि ऑटो चालकों के हौसले अब बुलंद हो चुके हैं और वे खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

सवालों के घेरे में पुलिस और प्रशासन:

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बड़वारा थाना पुलिस इस पूरे घटनाक्रम से अनजान कैसे रह सकती है? क्या रोज़ाना होने वाले विवाद और जाम की सूचना जिम्मेदारों तक नहीं पहुंचती, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?

मांग और चेतावनी:

अब स्थानीय लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि—

बसाड़ी मोड़ पर स्थायी पुलिस बल की तैनाती की जाए

ऑटो चालकों के लिए निश्चित स्टैंड और रूट तय किए जाएं

नियम तोड़ने वालों पर सख्त जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो

लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस “खुलेआम चल रहे गुंडाराज” पर कब तक लगाम कसता है, या फिर बसाड़ी मोड़ यूं ही अराजकता का प्रतीक बना रहेगा।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

anokhikalpana

अजय शर्मा | प्रधान संपादक

✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button