कानून का राज या चुनिंदा कार्रवाई? कटनी पुलिस की कार्यशैली पर आम आदमी पार्टी के तीखे सवाल
कानून का राज या चुनिंदा कार्रवाई? कटनी पुलिस की कार्यशैली पर आम आदमी पार्टी के तीखे सवाल

✍️ दिनेश पुरी गोस्वामी की रिपोर्ट
कटनी। जिले में हाल ही में सामने आए पुलिस से जुड़े दो बड़े मामलों ने कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम आदमी पार्टी ने इन घटनाओं को लेकर कटनी पुलिस की कार्रवाई को “चयनात्मक” बताते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की है।
क्या हैं हालिया मामले?
बहोरीबंद थाना प्रभारी अखिलेश दाहिया को एक पुलिस आरक्षक के ट्रैक्टर चालक से 500 रुपए रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद तत्काल लाइन अटैच कर दिया गया वहीं, कुठला थाना क्षेत्र में बारातियों पर हुए लाठीचार्ज मामले में ASI सौरभ सोनी और सिद्धार्थ राय पर कार्रवाई की गई इन कार्रवाइयों को अनुशासन की दिशा में जरूरी कदम माना जा रहा है, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहेगी?
उठ रहे हैं बड़े सवाल
आम आदमी पार्टी ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं—
कुठला थाना प्रभारी की जिम्मेदारी कब तय होगी, जिनके नेतृत्व में लाठीचार्ज की घटना हुई? यातायात थाना प्रभारी राहुल पांडे के खिलाफ पूर्व शिकायतों और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के बावजूद अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या कार्रवाई सिर्फ अधीनस्थ कर्मचारियों तक ही सीमित रहेगी?
कानूनी नजरिए से क्या कहता है सिस्टम?
प्रशासनिक सिद्धांत और भारतीय कानून यह स्पष्ट करते हैं कि— जिम्मेदारी केवल घटना को अंजाम देने वाले की नहीं होती
आदेश देने और निगरानी करने वाले अधिकारी भी बराबर के जिम्मेदार होते हैं निष्पक्षता तभी साबित होती है जब कार्रवाई पद नहीं, कृत्य के आधार पर हो
SP से सीधे सवाल
आम आदमी पार्टी ने कटनी पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा से सीधे सवाल किए हैं— क्या पूरे मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच होगी?
क्या वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी क्या पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
जनता की मांग
कटनी की जनता अब केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि पारदर्शी और निष्पक्ष न्याय चाहती है।
लोगों का कहना है कि यदि उच्च स्तर तक जवाबदेही तय नहीं हुई, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में भी दोहराई जाती रहेंगी 👉 अब देखना यह होगा कि कटनी पुलिस इन सवालों का जवाब कैसे देती है—और क्या कार्रवाई वाकई निष्पक्षता की कसौटी पर खरी उतरती है या नहीं।













