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सिंगरौली में खनन मामले ने पकड़ा तूल, अब EOW रीवा की एंट्री… KCCL कंपनी से मांगा जवाब, दस्तावेज तलब

सिंगरौली में खनन मामले ने पकड़ा तूल, अब EOW रीवा की एंट्री… KCCL कंपनी से मांगा जवाब, दस्तावेज तलब

आर्थिक प्रकोष्ठ इकई रीवा की एंट्री के बाद सिंगरौली जिले में लंबे समय से चल रहे कथित खनन अनियमितताओं के मामले ने नया मोड़ ले लिया है जिले में संचालित KCCL कंपनी के खिलाफ दर्ज शिकायतों पर अब औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है जानकारी के अनुसार, शिकायत क्रमांक 574/2025 के तहत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई रीवा ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को पत्र जारी कर जवाब मांगा है साथ ही खनन कार्यों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज, लाइेंस, अनुमति पत्र एवं संचालन संबंधी रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं सूत्रों के मुताबिक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी द्वारा लंबे समय से खदान संचालन के दौरान आवश्यक नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया आरोप यह भी है कि बिना पूर्ण वैध अनुमति एवं जरूरी लाइसेंस के खनन गतिविधियां संचालित होती रहीं, जिससे शासन को संभावित रूप से आर्थिक क्षति पहुंची है सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब यह पूरा मामला लंबे समय से जिले में चर्चा का विषय था, तब स्थानीय प्रशासन, संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी आखिरकार खामोश क्यों रहे? जिला प्रशासन, खनिज विभाग और निगरानी एजेंसियों की निष्क्रियता अब सवालों के घेरे में आ गई है स्थानीय स्तर पर लगातार उठ रही शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना कई गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। माना जा रहा है कि यदि प्रारंभिक जांच में शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो आने वाले दिनों में कई अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है सिंगरौली, जो प्रदेश में खनिज संपदा के लिए जाना जाता है, वहां खनन गतिविधियों को लेकर पहले भी कई बार अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं। लेकिन इस बार मामला सीधे Economic Offences Wing Madhya Pradesh तक पहुंचने के बाद पूरे जिले में चर्चा तेज हो गई है अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या स्थानीय जिम्मेदार अधिकारी अब भी चुप्पी साधे रहेंगे या फिर सिंगरौली के कथित खनन खेल का पूरा सच जनता के सामने आएगा आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े खुलासे होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता…आरोपों के सत्यापन के लिए कंपनी से यह दस्तावेज मांगे गए हैं:

PESO License की सत्यापित प्रति
Pollution Control Board से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC)
Fire Safety License
CTE (Consent to Establish) लाइसेंस
CTO (Consent to Operate) लाइसेंस
डीजल खरीदी से जुड़े बिल और Form-50
डीजल स्टोरेज टैंक का डिजाइन, ड्रॉइंग, DPR
माइनिंग शुरू होने से अब तक उपयोग किए गए डीजल का पूरा रिकॉर्ड

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

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अजय शर्मा | प्रधान संपादक

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