अवैध टपरा, अधूरी कार्रवाई और प्रशासन की चुप्पी, कटनी में कानून को खुलेआम चुनौती
अवैध टपरा, अधूरी कार्रवाई और प्रशासन की चुप्पी, कटनी में कानून को खुलेआम चुनौती

कटनी जिले की ग्राम पंचायत गुलवारा में स्थित शासकीय कन्या महाविद्यालय के ठीक सामने शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद उसी स्थान पर दोबारा टपरा लगाकर दुकान संचालित करने की कोशिश ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था, बल्कि बेटियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जय माता दी फोटो कॉपी सेंटर की आड़ में अवैध धंधा
जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति द्वारा “जय माता दी फोटो कॉपी सेंटर” के नाम पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के लंबे समय से शासकीय भूमि पर टपरा लगाकर टाइपिंग व अन्य निजी व्यवसाय संचालित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि संचालक पर्दे के पीछे रहकर काम करता है और नियमों को खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है।
प्रभारी प्राचार्य की बार-बार चेतावनी, फिर भी अनदेखी
कन्या महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य चित्रा प्रभात द्वारा इस अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं। शिकायतों में साफ तौर पर उल्लेख किया गया कि कॉलेज के सामने इस प्रकार की गतिविधियां छात्राओं की सुरक्षा, अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित कर रही हैं।
इसके बावजूद कार्रवाई में लगातार देरी ने प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए।
कार्रवाई हुई, लेकिन मज़ाक बनकर रह गई
लगातार दबाव के बाद एसडीएम कार्यालय कटनी के निर्देश पर राजस्व व नगर प्रशासन की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की और शासकीय भूमि को मुक्त कराया।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि महज दूसरे ही दिन उसी स्थान पर दोबारा दुकान संचालन की कोशिश सामने आ गई।
सबसे बड़ा सवाल: संरक्षण किसका?
क्या प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह गई है?
क्या अतिक्रमणकर्ता को किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है?
कन्या महाविद्यालय की छात्राओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
क्या राजस्व विभाग दोबारा सख्त और स्थायी कार्रवाई करेगा?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी जमीन पर बार-बार कब्जे की कोशिश न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है।
बेटियों की सुरक्षा से समझौता नहीं
कन्या महाविद्यालय जैसे संवेदनशील शैक्षणिक संस्थान के सामने किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि को हल्के में लेना गंभीर भूल साबित हो सकती है। यदि समय रहते कठोर और स्थायी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला सिर्फ अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन जाएगा।












