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कटनी में ‘जहर का कारोबार’ बेखौफ: एक्सपायरी गुटखे से खेली जा रही ज़िंदगियां, जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल

कटनी में ‘जहर का कारोबार’ बेखौफ: एक्सपायरी गुटखे से खेली जा रही ज़िंदगियां, जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में इन दिनों एक खतरनाक और चौंकाने वाला खेल बेखौफ तरीके से संचालित हो रहा है। जिले के बाजारों, गली-मोहल्लों और छोटे-छोटे दुकानों तक “कैश गुटखा” के नाम पर ऐसा जहर बेचा जा रहा है, जो अब केवल नशा नहीं, बल्कि लोगों के लिए धीमा मौत का कारण बनता जा रहा है जमीनी स्तर पर मिली जानकारी और स्थानीय स्रोतों से प्राप्त तथ्यों के अनुसार, बाजार में उपलब्ध कई गुटखा पैकेट्स में एक्सपायरी डेट में हेरफेर, निर्माण तिथि की अस्पष्टता और गुणवत्ता में गंभीर खामियां सामने आ रही हैं। यह स्थिति न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखा है, बल्कि सीधे तौर पर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।

‘हर पैकेट में खतरा’: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर के साथ-साथ कई अन्य घातक बीमारियों का कारण बनता है। ऐसे में यदि उत्पाद एक्सपायर या घटिया गुणवत्ता का हो, तो यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है डॉक्टरों के अनुसार, लगातार ऐसे उत्पादों का सेवन करने वाले लोगों में ओरल कैंसर, सबम्यूकस फाइब्रोसिस, दांतों और मसूड़ों की गंभीर बीमारियां तेजी से देखी जा रही हैं। इसके बावजूद कटनी में इन उत्पादों की खुलेआम बिक्री यह दर्शाती है कि लोगों की सेहत को लेकर कितनी बड़ी लापरवाही बरती जा रही है।

कानून की अनदेखी या जानबूझकर उल्लंघन?

देश में खाद्य और तंबाकू उत्पादों की बिक्री को लेकर स्पष्ट और कड़े कानून लागू हैं, लेकिन कटनी की स्थिति इन नियमों की खुली अनदेखी की ओर इशारा करती है फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत एक्सपायरी या घटिया खाद्य पदार्थ बेचना दंडनीय अपराध है, जिसमें भारी जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है

कोटपा एक्ट, 2003 के अंतर्गत तंबाकू उत्पादों पर स्पष्ट चेतावनी और निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है।

यदि किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है, तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 269 और 270 के तहत जानबूझकर या लापरवाही से जीवन को खतरे में डालने का मामला दर्ज किया जा सकता है।

इन कड़े प्रावधानों के बावजूद, कटनी में एक्सपायरी और संदिग्ध गुटखे की बिक्री यह सवाल खड़ा करती है कि क्या कानून का पालन हो रहा है या जानबूझकर उसे नजरअंदाज किया जा रहा है?

सप्लायर-दलालों का नेटवर्क, मिलीभगत की आशंका

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह कारोबार केवल कुछ दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सप्लायर, स्टॉकिस्ट और दलालों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो एक्सपायर या संदिग्ध गुटखे को बड़े पैमाने पर बाजार में खपा रहा है सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह पूरा खेल लंबे समय से जारी है, इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा ठोस कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है।

क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है, या फिर सिस्टम के भीतर कहीं न कहीं मिलीभगत भी मौजूद है?

जिम्मेदार विभागों पर उठते सवाल

खाद्य एवं औषधि विभाग, स्थानीय प्रशासन और संबंधित निगरानी एजेंसियों की भूमिका अब जांच के दायरे में है।

आम नागरिकों का सवाल है कि जब बाजार में खुलेआम संदिग्ध और एक्सपायर उत्पाद बिक रहे हैं, तो नियमित जांच और निगरानी कहां है?

यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह स्थिति जनस्वास्थ्य आपदा का रूप ले सकती है।

जनता की मांग: सख्त कार्रवाई हो

स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि—

संदिग्ध गुटखे पर तत्काल छापामार कार्रवाई की जाए

एक्सपायर उत्पादों को जब्त कर नष्ट किया जाए

सप्लायर, स्टॉकिस्ट और दलालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए

खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा विशेष जांच अभियान चलाया जाए

दोषियों को सख्त सजा देकर उदाहरण प्रस्तुत किया जाए

भविष्य के लिए खतरे की घंटी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के “जहर के कारोबार” पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले वर्षों में कटनी में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के मामलों में भारी वृद्धि हो सकती है, जिसका सीधा असर समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा।

अब सबसे बड़ा सवाल

कटनी में चल रहे इस खतरनाक खेल के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

क्या प्रशासन इस जहर के कारोबार पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर मुनाफे के इस काले खेल में शामिल लोगों के हौसले यूं ही बुलंद रहेंगे?

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

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अजय शर्मा | प्रधान संपादक

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