सिंगरौली में कानून नहीं, ‘सायरन संस्कृति’ का राज!
जर्जर सड़कें, बेलगाम यातायात और मौन प्रशासन पर गंभीर सवाल

सिंगरौली : सिंगरौली जिले की यातायात व्यवस्था आज अव्यवस्था, लापरवाही और नियमों के खुले उल्लंघन का प्रतीक बन चुकी है। सामान्य परिचर्चा के दौरान राष्ट्रीय अपराध अन्वेषण ब्यूरो के उपनिदेशक श्री चतुर्वेदी ने जिले की सड़कों और यातायात प्रबंधन को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सिंगरौली की सड़कों की हालत इतनी दयनीय है कि दिल्ली जैसी महानगर से तुलना भी बेमानी लगती है, जहां एक बार मजबूत और टिकाऊ सड़कें बनाकर सरकारी धन का सदुपयोग किया जाता है सिंगरौली में स्थिति इसके उलट है—बार-बार निर्माण, बार-बार खर्च और परिणाम शून्य। इससे भी गंभीर बात यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों में शासन का सायरन और पुलिस की लाल-नीली बत्ती खुलेआम प्रदर्शित हो रही है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है और प्रशासनिक सुस्ती को उजागर करती है जमीनी हकीकत यह है कि यातायात पुलिस की नजर केवल दो-पहिया वाहन चालकों पर रहती है, जबकि प्रभावशाली और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त वाहन सायरन और अन्य प्रतिबंधित उपकरणों के साथ बेखौफ सड़कों पर दौड़ रहे हैं। सवाल उठता है कि मध्यप्रदेश पुलिस नियमों के विरुद्ध चलने वाले इन वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती?
क्या कारण यह है कि कहीं ‘मालामाल जिले’ से स्थानांतरण का डर तो नहीं?
सिंगरौली में दुर्घटनाएं, अपराध और यातायात नियमों का उल्लंघन रोजमर्रा की घटना बन चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन का मौन हालात को और भयावह बना रहा है। इस पूरे मामले पर कलेक्टर गौरव बैनल और पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री की चुप्पी भी अब सवालों के घेरे में है।
यदि समय रहते इस अव्यवस्था पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो सिंगरौली एक प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बन जाएगा, जिसका हिसाब आने वाले समय में जनता मांगेगी।












