सिंगरौली में ‘प्रचंड प्रहार’ का सच क्या है? दो नाम, या सिर्फ बलि के बकरे—मास्टरमाइंड अब भी परदे में!
सिंगरौली में ‘प्रचंड प्रहार’ का सच क्या है? दो नाम, या सिर्फ बलि के बकरे—मास्टरमाइंड अब भी परदे में!

सिंगरौली। पिछले कई दिनों से फेसबुक आईडी ‘प्रचंड प्रहार’ पूरे सिंगरौली जिले में भय, भ्रम और आक्रोश का पर्याय बन चुकी थी। नाम और पहचान छुपाकर, किसी भी समय, किसी भी व्यक्ति, संस्था या समुदाय के विरुद्ध—बिना सत्यापन, बिना साक्ष्य और बिना जिम्मेदारी—खबरों के नाम पर ज़हर परोसा जा रहा था।
न यह देखा गया कि खबर का सामाजिक असर क्या होगा,
न यह कि उससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
पूरा जिला पूछ रहा था—
आख़िर ‘प्रचंड प्रहार’ कौन चला रहा है?
किसके इशारे पर?
कौन कर रहा है इसकी मॉनिटरिंग?
और इसके पीछे क्या षड्यंत्र है?
अधिवक्ता संघ की पहल, दो नामों पर FIR
अब इस रहस्यमय फेसबुक आईडी को लेकर अधिवक्ता संघ ने संगठित होकर प्रशासन को आवेदन दिया, गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किए।
इसी आधार पर पुलिस ने दो व्यक्तियों के नाम अपराध पंजीबद्ध कर दिया और उन्हें ‘प्रचंड प्रहार’ का संचालक बताया जा रहा है।
लेकिन यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—
क्या सच में यही दो लोग हैं?
या फिर ये सिर्फ बलि के बकरे हैं?** क्या वाकई दो लोग ही पूरे सिंगरौली में अराजकता फैला रहे थे?
या फिर असली मास्टरमाइंड कोई और है, जो अब भी परदे के पीछे सुरक्षित बैठा है?
जिले में यह चर्चा भी ज़ोर पकड़ रही है कि—
👉 कहीं इस पूरे खेल में पुलिस का कोई सिपाही या वरिष्ठ अधिकारी तो शामिल नहीं?
👉 क्या ‘प्रचंड प्रहार’ को आंतरिक संरक्षण मिला हुआ था?
👉 क्या इसलिए अब तक कोई बड़ा खुलासा सामने नहीं आया?
प्रशासन की चुप्पी, संदेह को दे रही हवा
यदि जिला प्रशासन के पास पुख्ता सबूत हैं,
तो फिर गिरफ्तारी के बाद प्रेस विज्ञप्ति क्यों नहीं?
प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं?
पूरा नेटवर्क उजागर क्यों नहीं किया जा रहा?
जनता अब सिर्फ FIR से संतुष्ट नहीं है।
सिंगरौली जानना चाहता है—
👉 सारे सरगना कौन हैं?
👉 फंडिंग कहां से हो रही थी?
👉 किस-किस ने संरक्षण दिया?
अगर खुलासा नहीं हुआ, तो सवाल और गहरे होंगे
अगर प्रशासन ने समय रहते पूरा सच सामने नहीं रखा,
तो यह मानने में देर नहीं लगेगी कि—
‘प्रचंड प्रहार’ जिला प्रशासन के संरक्षण में
न सिर्फ सिंगरौली, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में तांडव मचा रहा था।
मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
अब यह मामला केवल सिंगरौली तक सीमित नहीं रहा।
प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को स्वयं इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए—
उच्च स्तरीय जांच
या स्वतंत्र जांच समिति
का गठन करना चाहिए, ताकि
✔ सच्चाई सामने आए
✔ निर्दोषों को न्याय मिले
✔ और भविष्य में किसी भी प्रकार की
सामाजिक अशांति, दंगा या लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति उत्पन्न न हो।
सिंगरौली अब जवाब चाहता है—
‘प्रचंड प्रहार’ का पूरा सच, नामों के साथ, सबूतों के साथ, जनता के सामने।












