मोरवा में 16 वर्षीय पवन शाह की निर्मम हत्या से भड़का जनसैलाब, पुलिस की निष्क्रियता पर फूटा गुस्सा — गाड़ियों पर पथराव, कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल
48 घंटे पहले लापता था किशोर, समय रहते पुलिस सक्रिय होती तो बच सकती थी जान – पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप

खबर: सिंगरौली: अजय शर्मा
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के मोरवा थाना क्षेत्र में 16 वर्षीय युवक पवन शाह की निर्मम हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने न सिर्फ एक मासूम की जान छीन ली, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि पवन शाह करीब 48 घंटे पहले लापता हो गया था, लेकिन उसके गायब होने के बाद जिस तरह की सक्रियता पुलिस को दिखानी चाहिए थी, वह कहीं नजर नहीं आई स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सिंगरौली की मोरवा पुलिस समय रहते सक्रिय होती, तो संभव है कि 16 वर्षीय पवन शाह आज जिंदा होता। लेकिन लापरवाही, सुस्ती और उदासीनता ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया। अब जब सच्चाई सामने आई है तो पूरा मोरवा क्षेत्र गुस्से और आक्रोश से उबल रहा है घटना के बाद इलाके में तनाव इतना बढ़ गया कि लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कई जगह पुलिस वाहनों पर पथराव किया गया, गाड़ियों के चक्के तक निकाल दिए गए और पुलिस के सामने ही स्थिति बेकाबू होती नजर आई। लोगों का कहना है कि जब एक 16 वर्षीय किशोर की जान चली गई और पुलिस समय पर कुछ नहीं कर पाई, तो फिर ऐसी पुलिस व्यवस्था का क्या मतलब? इस पूरे घटनाक्रम ने सिंगरौली जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई कि जनता को खुद सड़क पर उतरकर आक्रोश जताना पड़ा। क्या यह प्रशासनिक विफलता नहीं है? पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि मोरवा पुलिस को इस पूरे मामले की कई महत्वपूर्ण जानकारियां पहले से थीं। उनका कहना है कि पुलिस को यह भी मालूम था कि पवन शाह के साथ क्या साजिश रची जा रही है, हत्या में किन लोगों का हाथ हो सकता है और घटना से पहले किस तरह की प्री-प्लानिंग की गई थी। लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई परिवार का दर्द साफ शब्दों में झलक रहा है। उनका कहना है कि अगर पुलिस ने समय रहते कदम उठाया होता, तो उनका बेटा आज जिंदा होता। लेकिन अब सब कुछ खत्म हो चुका है और एक परिवार अपने बेटे के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है इस पूरी घटना ने प्रदेश के पुलिस तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रदेश के डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या इस गंभीर घटना और बिगड़ी कानून व्यवस्था को देखते हुए मोरवा थाना के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी? क्या थाना प्रभारी पर गाज गिरेगी? क्या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ दबा दिया जाएगा?
लोगों का कहना है कि यह सिर्फ हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह पुलिस की जवाबदेही का भी सवाल है। अगर किसी की लापरवाही के कारण एक मासूम की जान चली जाती है, तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए इस घटना के बाद सिंगरौली जिले के तथाकथित समाजसेवियों और सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े उपदेश देने वाले लोगों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बन गई है। आम लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो लोग रोज फेसबुक पर समाज और न्याय की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वे आज खामोश क्यों हैं? क्या सिंगरौली का दर्द उन्हें दिखाई नहीं दे रहा या फिर किसी दबाव या स्वार्थ के कारण उनकी आवाज बंद हो गई है? स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समाज के जिम्मेदार लोग भी ऐसे मामलों में चुप रहेंगे, तो फिर न्याय की उम्मीद किससे की जाए। उनका साफ कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज का सवाल है लोगों ने मांग की है कि पवन शाह की हत्या के दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। साथ ही यदि जांच में पुलिस की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए मोरवा में हुई यह घटना सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और कानून व्यवस्था की परीक्षा भी है। अब देखना यह है कि प्रदेश के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कार्रवाई होती है। पूरे सिंगरौली जिले की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।












