जहाँ पुलिस दिखती है, वहीं चोरी होती है — गश्त का दावा, चोरी का तांडव — सिंगरौली में कानून-व्यवस्था पर संकट
जहाँ पुलिस दिखती है, वहीं चोरी होती है — गश्त का दावा, चोरी का तांडव — सिंगरौली में कानून-व्यवस्था पर संकट

सिंगरौली। जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। पुलिस की तथाकथित रात्रि गश्त और ज़मीनी हकीकत के बीच का अंतर अब साफ़ दिखाई देने लगा है। हर रात पुलिसकर्मियों द्वारा एकजुट होकर मोबाइल से फोटो खिंचवाना, उसे प्रशासनिक ग्रुपों में साझा करना और गश्त का दावा करना अब केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि दूसरी ओर पूरे जिले में चोर खुलेआम वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
रात भर चोरी, सुबह सिर्फ़ आश्वासन
जिले के अलग-अलग इलाकों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
कहीं मोटरसाइकिल चोरी,
कहीं चारपहिया वाहनों की बैटरी और पार्ट्स गायब,
तो कहीं घरों की छत और दीवार तोड़कर अंदर घुसकर चोरी की घटनाएं हो रही हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये घटनाएं कोई एक-दो दिन की नहीं, बल्कि लगातार सामने आ रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने कई बार पुलिस को सूचना दी, शिकायतें दर्ज कराईं, यहां तक कि प्रत्यक्ष रूप से चोरों को भागते हुए भी देखा गया, लेकिन हर बार अपराधी बचकर निकल गए।
गश्त अगर हो रही है, तो अपराध क्यों नहीं रुक रहा?
यह सवाल अब आमजन की जुबान पर है।
अगर पुलिस वास्तव में पूरी रात अपने क्षेत्र में गश्त कर रही है, तो फिर—
चोरों की धरपकड़ क्यों नहीं हो पा रही?
हर वारदात के बाद वही रटा-रटाया जवाब “जांच जारी है” क्यों दिया जाता है?
चोरी की घटनाओं का कोई ठोस खुलासा अब तक क्यों नहीं हुआ?
इन सवालों के जवाब न मिलने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह गहराता जा रहा है।
जनता के आरोप: लापरवाही या मिलीभगत?
अब मामला सिर्फ लापरवाही का नहीं रह गया है।
लगातार हो रही घटनाओं और चोरों के बच निकलने से जनता के बीच यह धारणा बन रही है कि
या तो पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय है,
या फिर अपराधियों को मौन संरक्षण मिल रहा है।
लोगों का साफ कहना है कि अगर चोरों का मनोबल आज इस कदर बढ़ा हुआ है, तो इसके पीछे प्रशासनिक कमजोरी या अंदरूनी सांठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता। यह आरोप किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लगातार सामने आ रहे मामलों और जनबयानों का नतीजा है।
रात में तस्वीरें, दिन में अपराध
पुलिस की रात्रि गश्त अब सवालों के घेरे में है।
रात में ली गई तस्वीरें भले ही प्रशासनिक रिकॉर्ड में सक्रियता दिखाएं, लेकिन दिन निकलते ही चोरी की नई घटनाएं इन दावों की पोल खोल देती हैं।
आज स्थिति यह है कि—
आम नागरिक अपने ही घर में असुरक्षित महसूस कर रहा है
लोग खुद पहरा देने को मजबूर हैं
अपराधियों में पुलिस का कोई भय दिखाई नहीं देता
कानून-व्यवस्था पर संकट
कानून-व्यवस्था किसी भी जिले की रीढ़ होती है। लेकिन सिंगरौली में यह रीढ़ कमजोर होती दिख रही है। पुलिस पर से जनता का भरोसा लगातार टूट रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब पुलिस की मौजूदगी के बावजूद चोरी हो रही है, तो फिर सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
सिंगरौली पुलिस को देना होगा जवाब
अब समय आ गया है कि पुलिस प्रशासन केवल औपचारिक बयान और फोटो के सहारे काम न चलाए।
जरूरत है—
प्रभावी रात्रि गश्त की
संवेदनशील इलाकों में सख़्त निगरानी की
और चोरी की घटनाओं में तत्काल गिरफ्तारी व खुलासे की
जब तक चोरों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह सवाल उठता रहेगा कि
आखिर सिंगरौली में रात को जागता कौन है—पुलिस या चोर?












