नाली–पानी में डूबा सिंगरौली, सोशल मीडिया में उलझी नगर निगम आयुक्त!
80% जनता बेहाल, आयुक्त की प्राथमिकता फेसबुक पोस्ट और रील्स?

सिंगरौली: नगर पालिका निगम सिंगरौली क्षेत्र में नाली, पानी, धूल, सड़क, साफ-सफाई और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं को लेकर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत नागरिक इन समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन जिनके कंधों पर समाधान की जिम्मेदारी है, वही आयुक्त महोदया सविता प्रधान गौड़ इन जमीनी समस्याओं से बेपरवाह दिखाई दे रही हैं—ऐसा आरोप अब खुले तौर पर आम जनता और पार्षदों द्वारा लगाया जा रहा है।
नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है, धूल से लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है, पेयजल आपूर्ति अनियमित है और शिकायतों का निस्तारण कागज़ों तक सिमट कर रह गया है। इसके बावजूद आयुक्त मैडम का अधिकतर समय सोशल मीडिया पर रील्स और आपत्तिजनक/भ्रामक संदेश देने वाली पोस्ट्स में व्यस्त रहने का आरोप लगाया जा रहा है। हाल ही में फेसबुक पर की गई एक पोस्ट को लेकर भी नगर निगम क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सवाल यह है कि ऐसी पोस्ट्स के ज़रिये आयुक्त मैडम जनता को आखिर क्या संदेश देना चाहती हैं?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि आयुक्त महोदया का ध्यान सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों और नेताओं तक सीमित होकर रह गया है। पूर्व में आयोजित पार्षदों की बैठक में भी केवल भाजपा पार्षदों को बुलाए जाने की चर्चा रही, जबकि अन्य दलों के निर्वाचित पार्षदों को नज़रअंदाज़ किया गया। इससे यह संदेश गया कि प्रशासनिक पद पर बैठी आयुक्त अब निष्पक्ष प्रशासन की बजाय राजनीतिक पक्षधरता की राह पर चल रही हैं।
नगर निगम क्षेत्र के नागरिकों और विपक्षी पार्षदों का कहना है कि यह कोई एक-दो दिन की बात नहीं, बल्कि लंबे समय से समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। शिकायतें दर्ज होती हैं, निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं देता। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आयुक्त महोदया को सिंगरौली नगर निगम का दायित्व सौंपने का उद्देश्य आखिर क्या था?
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह आरोप किसी एक मीडिया संस्थान के नहीं, बल्कि आम जनता और स्वयं नगर निगम के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की आवाज़ हैं। जनता पूछ रही है—
क्या आयुक्त महोदया को सोशल मीडिया प्रबंधन के लिए भेजा गया है या नगर निगम की बदहाल व्यवस्था सुधारने के लिए?
क्या नगर निगम सभी पार्षदों और नागरिकों का है या केवल सत्ताधारी दल का?
क्या प्रशासनिक निष्पक्षता अब केवल फाइलों में सिमट कर रह गई है?
फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयुक्त मैडम अपनी कार्यशैली में सुधार लाती हैं या नहीं। यदि जल्द ही जमीनी समस्याओं पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आक्रोश और भी तेज़ हो सकता है। सिंगरौली की जनता अब रील्स और पोस्ट्स नहीं, बल्कि नालियों की सफाई, पानी की आपूर्ति और साफ-सुथरी सड़कें चाहती है।
अब देखना यह है कि आयुक्त महोदया जनता की इस आवाज़ को सुनती हैं या फिर सवालों का यह सिलसिला यूँ ही और गहराता जाएगा।












