सरकार के आदेश बेअसर! सिंगरौली में खुलेआम मांस-मदिरा का कारोबार, मुख्यालय के 5 किमी दायरे में कानून की उड़ रही धज्जियां
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, नगर निगम में बैठे जिम्मेदारों पर उठे सवाल – क्या माफियाओं के सामने बेबस है प्रशासन?

मध्य प्रदेश में सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा पूर्व में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि राज्य के किसी भी जिले में खुले में मांस और मदिरा का क्रय-विक्रय नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर शराब सेवन पर भी रोक लगाने की बात कही गई थी, ताकि शहरों का वातावरण स्वच्छ और अनुशासित बना रहे लेकिन यदि जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो सिंगरौली जिले में शासन के इन आदेशों का पालन होता कहीं दिखाई नहीं देता। यहां खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और प्रशासनिक तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है सबसे गंभीर स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर के दायरे में ही खुले में मांस और शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। सड़कों के किनारे खुलेआम मांस की दुकानें संचालित हो रही हैं, वहीं दिन के उजाले से लेकर देर रात तक कई स्थानों पर लोग खुले में शराब का सेवन करते नजर आ जाते हैं। इससे न केवल शहर का वातावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार लिखित शिकायतें नगर पालिका निगम सिंगरौली के अध्यक्ष देवेश पांडे को दी गईं लोगों ने खुले में मांस क्रय-विक्रय और सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन इन शिकायतों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
शहरवासियों का कहना है कि उनके द्वारा दिए गए आवेदन और शिकायतें मानो कागजों के ढेर में दबकर रह जाती हैं। कुछ लोगों का तो यह भी आरोप है कि शिकायत करने वाले लोगों को ही तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिससे आम नागरिकों में भय और असंतोष का माहौल बन गया है।
माफियाओं का बढ़ता प्रभाव
नागरिकों का आरोप है कि शहर में खुले में मांस और मदिरा का कारोबार करने वाले व्यापारियों को संरक्षण दिया जा रहा है। यही कारण है कि नियमों की खुलेआम अनदेखी के बावजूद किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं होती।
परिणामस्वरूप स्थिति यह बन गई है कि जहां एक ओर आम नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर भटकने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर कथित माफियाओं का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कई स्थानों पर देर रात तक शराब सेवन करने वाले लोगों की मौजूदगी से क्षेत्र का माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
शासन के आदेशों पर सवाल
जब प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा स्पष्ट रूप से नियम निर्धारित किए गए हैं, तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उन आदेशों का पालन स्थानीय स्तर पर क्यों नहीं कराया जा रहा। क्या प्रशासनिक तंत्र इन नियमों को लागू करने में असमर्थ है, या फिर किसी दबाव के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है?
शहर के कई सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में यह स्थिति और गंभीर रूप ले सकती है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जहां भी खुले में मांस और मदिरा का अवैध क्रय-विक्रय हो रहा है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन करने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि शहर का वातावरण सुरक्षित और अनुशासित बनाया जा सके।












