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100% भुगतान, 60% काम—किसकी शह पर चल रहा खेल? सिंगरौली नगर निगम में टेंडर घोटाले की बू!

एक लाख का काम 70 हजार में कैसे? गुणवत्ता या भ्रष्टाचार—जवाब दे प्रशासन

सिंगरौली – अजय शर्मा • भूपेंद्र पाडे

मध्यप्रदेश का सिंगरौली जिला एक बार फिर नगर पालिका निगम सिंगरौली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है निगम में कार्यों को लेकर लगातार यह आरोप लगते रहे हैं कि यहां टेंडर प्रक्रिया और कार्य निष्पादन में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। अब हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि नगर निगम आयुक्त, महापौर और अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक हो गया है नगर निगम सिंगरौली द्वारा करोड़ों और लाखों रुपये के विकास कार्यों के टेंडर जारी किए जाते हैं, लेकिन आरोप है कि निविदाकार जानबूझकर 10, 20, यहां तक कि 40 प्रतिशत तक कम दरों पर टेंडर डाल रहे हैं। इसके बाद वही कार्य 100 प्रतिशत भुगतान के बावजूद मात्र 60 या 70 प्रतिशत गुणवत्ता और लागत में पूरे कर दिए जाते हैं।

एक लाख का काम 70 हजार में कैसे?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी कार्य की स्वीकृत लागत 1 लाख या 1 करोड़ रुपये है, तो वह कार्य 70 या 80 प्रतिशत राशि में कैसे पूरा कर दिया जाता है? क्या यह बिना गुणवत्ता से समझौता किए संभव है?

या फिर यह सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है? नियमों की आड़ में खेल या मिलीभगत?

जानकारों का कहना है कि इतनी कम दरों पर टेंडर डालने के बाद न तो गुणवत्ता बनाए रखना संभव है और न ही निर्धारित मानकों का पालन। ऐसे में यह आशंका और गहरी हो जाती है कि कहीं यह सब निविदाकारों और निगम अधिकारियों की मिलीभगत से तो नहीं हो रहा? यदि कार्य 60–70 प्रतिशत लागत में पूरे हो रहे हैं, तो क्या सामग्री की गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है? क्या मापदंडों में हेराफेरी हो रही है? या फिर बिलों में जानबूझकर खेल किया जा रहा है?
शासन से जवाब मांगता सिंगरौली अब सवाल यह भी उठता है कि क्या मध्यप्रदेश शासन का कोई ऐसा निर्देश है, जिसमें स्वीकृत दर से काफी कम पर टेंडर डालकर भी गुणवत्तापूर्ण कार्य कराना संभव बताया गया हो? यदि ऐसा कोई निर्देश नहीं है, तो फिर यह पूरा खेल किसके संरक्षण में चल रहा है?
जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा? नगर निगम सिंगरौली में हो रहे इस कथित टेंडर खेल ने आमजन के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आख़िर जनता के टैक्स के पैसों की निगरानी कौन कर रहा है?

 

अब समय आ गया है कि नगर निगम प्रबंधन और जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब दे, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि अनियमितता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

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✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

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