जाति विशेष को प्राथमिकता और पैसों से नौकरी? सिंगरौली में कलिंगा कॉरपोरेशन कटघरे में
रोजगार नहीं, रिश्वत का राज! कलिंगा कॉरपोरेशन में भर्ती को लेकर बड़ा खुलासा
मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में NCL (नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के अंतर्गत कार्य कर रही निजी ठेका कंपनी कलिंगा कॉरपोरेशन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस कथित भ्रष्टाचार में किसी बाहरी व्यक्ति की नहीं बल्कि कंपनी के ही कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की आपसी मिलीभगत बताई जा रही है सूत्रों का दावा है कि स्थानीय पढ़े-लिखे और योग्य युवाओं को रोजगार से वंचित कर, लाखों रुपये लेकर बाहरी लोगों को नौकरी पर रखा जा रहा है। आरोप यह भी है कि भर्ती प्रक्रिया में जाति एवं वर्ग विशेष को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं और विस्थापितों के अधिकारों का हनन हो रहा है सूत्रों के अनुसार, यदि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जाँच कराई जाए, तो कई वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका सामने आ सकती है। आरोपों के घेरे में जिन अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें आशीष, विकास, आलोक चंद्र, आलोक कुमार (GM, अमलोहरी) तथा राघवेंद्र प्रताप सिंह (GM, HR) शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है सूत्र यह भी आरोप लगाते हैं कि कथित अनियमितताओं के कारण कंपनी के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुँच रहा है। इतना ही नहीं, कुछ अधिकारियों द्वारा अपने बचाव के लिए कथित रूप से स्थानीय स्तर पर “एजेंट” नियुक्त करने और उनके माध्यम से अपनी छवि सुधारने का भी दावा किया जा रहा है। वहीं, पहले स्थानांतरित या सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों पर कथित रूप से दोष मढ़े जाने की बात भी सामने आ रही है स्थानीय लोगों और युवाओं का कहना है कि यदि कंपनी के CMD स्तर से इस पूरे मामले की विस्तृत और स्वतंत्र जाँच कराई जाए, तो सच्चाई सामने आ सकती है। उनका यह भी कहना है कि जाँच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि संबंधित अधिकारी वास्तव में ईमानदार हैं या नहीं फिलहाल, यह पूरा मामला आरोपों और सूत्रों के दावों पर आधारित है। संबंधित कंपनी प्रबंधन और नामजद अधिकारियों की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।













