अवैध वसूली के आरोपों में घिरे गजानंद बैगा माइनिंग से नगर तहसील तक विवादों का पीछा
गजानंद बैगा पर फिर गंभीर आरोप: वायरल ऑडियो वसूली और धमकी से हिला सिंगरौली प्रशासन
सिंगरौली – जिले के माइनिंग विभाग में पदस्थ रहे गजानंद बैगा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। ट्रांसपोर्टरों से कथित अवैध वसूली, धमकाने तथा आदिवासी एक्ट में जबरन फंसाने से जुड़े वायरल ऑडियो और पीड़ित के आवेदन के आधार पर उन्हें पहले ही नगर तहसील में अटैच किया जा चुका है। बताया जाता है कि उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था, जिसका जवाब देने में उन्होंने लापरवाही बरती सूत्रों के अनुसार, पूर्व माइनिंग अधिकारी अशोक राय, वर्तमान माइनिंग अधिकाारी आकांक्षा पटेल एवं खनिज अधिकारी विद्याकांत तिवारी, अशोक शर्मा, सुरेंद्र बहादुर सिंह, सुभाष विश्वकर्मा (बैच नंबर 117, नगर सेना) सहित अन्य अधिकारियों ने गजानंद बैगा की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार आपत्ति दर्ज कराई थी आरोप है कि गजानंद बैगा अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी करते हुए मनमानी करते रहे, जिससे विभागीय माहौल तनावपूर्ण हो गया।
पूर्व कलेक्टर ने लिखा था भोपाल तक पत्र….?
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले के तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने प्रमुख सचिव एवं खनिज विभाग संचालक, भोपाल को पत्र लिखकर गजानंद बैगा को जिले से बाहर स्थानांतरित करने की अनुशंसा की थी। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि झूठे या मनगढ़ंत मामलों में गंभीर अपराध दर्ज होने से निर्दोष लोगों का जीवन बर्बाद हो जाता है—लंबी न्यायिक लड़ाई, हाईकोर्ट के चक्कर और अंततः वर्षों बाद दोषमुक्ति, लेकिन तब तक अपूरणीय क्षति हो चुकी होती है।
हालांकि, पत्र लिखे जाने के बावजूद आज दिनांक तक स्थानांतरण नहीं किया गया, जिससे प्रशासनिक स्तर पर असंतोष बना हुआ है।
[ नगर तहसील में भी विवाद बरकरार ]माइनिंग विभाग से हटाकर नगर तहसील में अटैच किए जाने के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। आरोप है कि गजानंद बैगा द्वारा कार्य नहीं करने, ड्यूटी से गायब रहने और अब भुगतान न होने तथा जातिगत भेदभाव जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं। वहीं, तहसील स्तर के कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी को सच्चाई जाननी है तो नगर तहसील में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच करा ली जाए—कितने दिन ड्यूटी की गई, कितने दिन अनुपस्थित रहे और कार्यशैली कैसी रही, सब कुछ रिकॉर्ड में है।
नगर तहसील में पदस्थ तहसीलदार सविता यादव ने भी स्पष्ट किया है कि वे जांच से नहीं भाग रही हैं और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की पक्षधर हैं, चाहे वह कोई भी हो।
[वसूली के आरोपों की छाया हर विभाग पर]कर्मचारियों का आरोप है कि गजानंद बैगा जहां भी पदस्थ होते हैं, वहां आरोप–प्रत्यारोप का माहौल बन जाता है। चर्चा यह भी है कि माइनिंग विभाग की तरह नगर तहसील में भी अतिरिक्त प्रभार की मांग कथित रूप से वसूली के उद्देश्य से की जा रही थी, जिसे पूरा न किए जाने पर विवाद बढ़ा।
[ फिर उठी जिले से बाहर करने की मांग ]अब वर्तमान कलेक्टर गौरव बैंनल से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे पुनः प्रमुख सचिव एवं खनिज विभाग संचालक, भोपाल को पत्र लिखकर गजानंद बैगा को जिले से बाहर स्थानांतरित करें, ताकि जिले के अधिकारी–कर्मचारी स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सकें और प्रशासनिक शांति बनी रहे।
सवाल साफ है…
सच्चाई जांच के दायरे में है, साक्ष्य मौजूद हैं और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की सहमति भी
अब तय प्रशासन और समाज को करना है—
क्या ऐसे विवादित और आरोपों से घिरे व्यक्ति का संरक्षण किया जाएगा,
या फिर उन ईमानदार अधिकारी–कर्मचारियों का,
जो बिना दबाव, बिना वसूली, निष्ठा और ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।













