फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से नौकरी और दोहरे फर्जी बिलों से शासकीय राशि के दुरुपयोग की शिकायत**
कटनी उद्योग विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप
कटनी | मनोज सिंह परिहार
कटनी जिले के उद्योग विभाग में पदस्थ कर्मचारी राजेश पटेल पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों एवं सूत्रों के अनुसार, आरोप है कि संबंधित कर्मचारी ने फर्जी दिव्यांग (विकलांगता) प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय सेवा प्राप्त की तथा बाद में दोहरे फर्जी बिल प्रस्तुत कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया बताया जा रहा है कि प्रकरण की जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया, किंतु निर्धारित समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इस संबंध में सूचना छिपाने एवं टालमटोलपूर्ण जवाब देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
RTI नियमों के उल्लंघन का आरोप….
RTI आवेदन में दिव्यांग प्रमाण पत्र, सेवा अभिलेख, बिल भुगतान, नोटशीट एवं सत्यापन से संबंधित बिंदुवार जानकारी मांगी गई थी। आरोप है कि—
30 दिवस की वैधानिक अवधि में सूचना नहीं दी गईरिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद अधूरी जानकारी दी गई
कई बिंदुओं पर कोई उत्तर नहीं दिया गया
यह स्थिति RTI अधिनियम की धारा 7(1) का उल्लंघन मानी जा रही है, जिसमें लोक सूचना अधिकारी को समयबद्ध एवं पूर्ण सूचना देना अनिवार्य है।
सार्वजनिक रिकॉर्ड छिपाने पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि जब मांगी गई जानकारी सार्वजनिक अभिलेखों का हिस्सा है, तो उसे उपलब्ध न कराना संदेह को जन्म देता है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इससे फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र एवं फर्जी बिलों से जुड़े तथ्यों की जांच प्रभावित हो सकती है।
कानूनी प्रावधान
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पाए जाने पर सेवा से बर्खास्तगी एवं आपराधिक कार्यवाही का प्रावधान
फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दंडनीय अपराध
RTI में सूचना न देने पर संबंधित लोक सूचना अधिकारी पर प्रतिदिन ₹250 के हिसाब से अधिकतम ₹25,000 तक जुर्माना एवं विभागीय कार्यवाही का प्रावधान
जांच की मांग
प्रकरण को लेकर मांग की जा रही है कि—दिव्यांग प्रमाण पत्र की मेडिकल बोर्ड से पुनः जांच कराई जाए
भुगतान से जुड़े मामलों की स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराई जाएRTI में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर दंडात्मक कार्यवाही हो
पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाएयदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित न रहकर उद्योग विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।













