रोजगार बेचने से लेकर डीजल चोरी तक—वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल KCCL कलिंगा
जमीन हमारी, बेरोजगारी हमारी—तो रोजगार बाहर वालों को क्यों? कंपनी की भर्ती प्रक्रिया पर बड़े सवाल
सिंगरौली। KCCL कंपनी में चल रहे कथित भ्रष्टाचार ने अब ऐसी शक्ल अख्तियार कर ली है कि यह महज़ अनियमितता नहीं, बल्कि संगठित लूट और साजिश का तंत्र प्रतीत होने लगा है। कंपनी के राजस्व को नुकसान पहुँचाने वाले मामलों से लेकर रोजगार में खुलेआम भेदभाव तक, हर मोर्चे पर सवाल खड़े हो रहे हैं—और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सब बिना वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत के संभव है? सूत्रों के अनुसार, आशीष, विकास, आलोक चंद्र, आलोक कुमार (GM, अमलोहरी) और राघवेंद्र प्रताप सिंह (GM, HR) जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। वर्षों से चल रही अनियमितताओं के बावजूद इन पर कोई ठोस कार्रवाई न होना, प्रशासनिक संरक्षण की आशंका को और गहरा करता है स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी में रोजगार अब योग्यता से नहीं, सिफारिश और सौदेबाजी से मिल रहा है। सिंगरौली जिले के पढ़े-लिखे, योग्य और विस्थापित परिवारों के युवा बेरोजगारी की आग में झोंके जा रहे हैं, जबकि बाहरी जिलों और राज्यों से लोगों को लाकर नौकरी दी जा रही है। सवाल साफ है जब जमीन सिंगरौली की छीनी गई, विस्थापन सिंगरौली का हुआ, तो रोजगार बाहर वालों को क्यों? अमलोरी क्षेत्र में डीजल चोरी को लेकर उठते रहे आरोप भी अब दबाए नहीं जा सकते। सूत्रों का कहना है कि यह खेल वर्षों से चल रहा है और इसमें अधिकारी, ठेकेदार और दलालों की मजबूत चेन काम कर रही है। अगर ऐसा है, तो यह सीधे-सीधे कंपनी के राजस्व से गद्दारी और सार्वजनिक संपत्ति की लूट है जबकि सच यह है कि जिन विस्थापित परिवारों को रोजगार देने का भरोसा देकर उनकी जमीन ली गई, वे आज न जमीन के मालिक हैं, न नौकरी के फाइलों में सब कुछ “नियमों के अनुसार” है, लेकिन ज़मीन पर हकीकत यह है कि सिंगरौली का युवा हताश, बेरोजगार और ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
अब सवाल यह नहीं है कि जांच हो या नहीं— सवाल यह है कि जांच कब और किस स्तर की होगी?
क्या जिले के कलेक्टर साहब भर्ती रिकॉर्ड, चयन सूची, डीजल आपूर्ति और अधिकारियों की संपत्ति की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराएंगे?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबाकर युवाओं को चुप रहने पर मजबूर किया जाएगा?
सिंगरौली का युवा अब भीख नहीं, अपना हक मांग रहा है।
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सिस्टम नहीं, बल्कि सिस्टम चलाने वाले ही सबसे बड़े दोषी हैं













