कटनीखबरमध्य प्रदेश

गरीबों का हक डकार गई पंचायत, छिंदहाई पिपरिया में राशन घोटाले का बड़ा खेल, अमीरों को मिल रहा मुफ्त गल्ला

गरीबों का हक डकार गई पंचायत, छिंदहाई पिपरिया में राशन घोटाले का बड़ा खेल, अमीरों को मिल रहा मुफ्त गल्ला

मनोज सिंह परिहार | कटनी

कटनी जिले के जनपद पंचायत बड़वारा अंतर्गत ग्राम पंचायत छिंदहाई पिपरिया से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां गरीबों के हक पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है। आरोप है कि पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मिलकर सरकारी योजनाओं को मजाक बना चुके हैं ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में सचिव और रोजगार सहायक की मनमानी चरम पर है। पंचायत भवन कब खुलेगा, इसका कोई समय तय नहीं है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए करीब 15 किलोमीटर दूर कर्मचारियों के घर तक भटकना पड़ रहा है सबसे गंभीर आरोप राशन वितरण को लेकर सामने आए हैं ग्रामीणों के मुताबिक, करीब दो से तीन माह पहले बगैहा और कछड़ारी गांव के कई पात्र गरीब परिवारों के नाम खाद्यान्न सूची से बिना किसी कारण के काट दिए गए। आरोप है कि यह पूरा खेल जनपद पंचायत बड़वारा में पदस्थ शाखा प्रभारी और कम्प्यूटर ऑपरेटर की मिलीभगत से किया गया नाम कटने के बाद गरीब परिवार अब राशन के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि दूसरी ओर गांव के कई संपन्न और रसूखदार लोगों के नाम सूची में जोड़ दिए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के पास 25 से 50 एकड़ तक जमीन, ट्रैक्टर और चार पहिया वाहन हैं, वे भी सरकारी राशन का लाभ उठा रहे हैं ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ राशन तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य शासकीय योजनाओं में भी पात्र लोगों को नजरअंदाज कर अपात्र और प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। कई बार शिकायत और निवेदन के बावजूद अब तक किसी गरीब का नाम दोबारा नहीं जोड़ा गया है इस मामले को लेकर जब जनपद पंचायत बड़वारा की सीईओ प्रभा टेकाम से बात की गई थी, तो उन्होंने जांच और नोटिस जारी करने का आश्वासन दिया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक न जांच दिखी और न ही किसी पर कार्रवाई हुई अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर गरीबों का हक किसकी मिलीभगत से छीना जा रहा है? और जिम्मेदार अधिकारी आखिर कब तक चुप्पी साधे रहेंगे? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे पंचायत भवन के सामने धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

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