एमपी कांग्रेस में प्रवक्ताओं की परीक्षा! ‘टैलेंट हंट’ के नाम पर मीडिया में एंट्री पर ब्रेक
एमपी कांग्रेस में प्रवक्ताओं की परीक्षा! ‘टैलेंट हंट’ के नाम पर मीडिया में एंट्री पर ब्रेक

भोपाल/सिंगरौली।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी में अब प्रवक्ता बनना सिर्फ पद नहीं, बल्कि परीक्षा पास करने का मामला बन गया है। पार्टी ने प्रवक्ताओं के चयन को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए ‘टैलेंट हंट कार्यक्रम’ शुरू कर दिया है। इसके तहत जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक प्रदेश के सभी कांग्रेस प्रवक्ताओं को मीडिया और टीवी डिबेट से अस्थायी रूप से बाहर कर दिया गया है प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के अनुमोदन और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर जारी इस आदेश ने पार्टी के भीतर ही हलचल मचा दी है। कांग्रेस भवन, भोपाल से जारी पत्र में साफ कहा गया है कि डिजिटल मीडिया और टेलीविजन डिबेट में प्रवक्ताओं को भेजने का अधिकार अब केवल मीडिया विभाग अध्यक्ष के पास रहेगा।
मीडिया मैनेजमेंट पर सेंट्रल कंट्रोल
आदेश के मुताबिक, टैलेंट हंट की अवधि पूरी होने तक किसी भी प्रवक्ता को टीवी डिबेट या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भेजने का निर्णय केंद्रीय स्तर से होगा। यह व्यवस्था अस्थायी बताई गई है, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत गहरे माने जा रहे हैं।
कमज़ोर प्रदर्शन पर सख्ती या अंदरूनी असंतोष?
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि—
क्या कांग्रेस नेतृत्व मीडिया डिबेट में कमजोर पड़ रहे प्रवक्ताओं से नाराज़ है?
क्या यह फैसला बेलगाम बयानों पर लगाम कसने की कोशिश है?
या फिर पार्टी में नई और आक्रामक फौज तैयार करने की रणनीति?
नए चेहरों को मौका, पुराने दिग्गजों की छुट्टी?
टैलेंट हंट के नाम पर यह आदेश साफ इशारा करता है कि अब पार्टी में वही चेहरा सामने आएगा जो लाइन, लैंग्वेज और लॉजिक—तीनों में फिट बैठेगा। पुराने प्रवक्ताओं के लिए यह एक तरह से री-टेस्ट माना जा रहा है।
पत्र पर संगठन प्रभारी महामंत्री डॉ. संजय कामले के हस्ताक्षर हैं और इसकी प्रति प्रदेश के तमाम वरिष्ठ नेताओं को भेजी गई है।
राजनीतिक संदेश साफ
कांग्रेस अब मैदान में सिर्फ नारे नहीं, बल्कि मीडिया वारफेयर भी नए सिरे से लड़ने की तैयारी में है। सवाल बस इतना है—
इस ‘टैलेंट हंट’ से पार्टी को धार मिलेगी या अंदरूनी खींचतान और तेज होगी?












