हेलमेट सिर पर, सीटबेल्ट शरीर पर… तभी सफर होगा सुरक्षित हम बदलेंगे सिंगरौली बदलेगा
हेलमेट सिर पर, सीटबेल्ट शरीर पर… तभी सफर होगा सुरक्षित हम बदलेंगे तभी सिंगरौली बदलेगा

कहानी सिर्फ सिंगरौली की नहीं है कहानी उस पिता की है जो सुबह घर से निकलते समय अपने बेटे से कहता है – “जल्दी वापस आऊंगा…” कहानी उस मां की है जो शाम को दरवाजे पर दरवाजे की ओर देखती रहती है, कहानी उस पत्नी की है जो अपने पति के सुरक्षित लौटने की दुआ करती है और कहानी उन बच्चों की है जो हर दिन अपने पिता के घर आने का इंतजार करते हैं लेकिन सिंगरौली की सड़कों पर एक सवाल बार-बार खड़ा हो जाता है। जब भी कोई दुर्घटना होती है तो हम कहते हैं बड़ी गाड़ी जिम्मेदार है, सड़क जिम्मेदार है, व्यवस्था जिम्मेदार है, लेकिन क्या कभी हमने खुद से पूछा कि हमारी अपनी जिम्मेदारी क्या थी? मध्य प्रदेश का एकमात्र सिंगरौली जिला जहां आज भी बहुत से लोग हेलमेट को बोझ समझते हैं, सीट बेल्ट को जरूरी नहीं मानते और ट्रैफिक नियमों को सिर्फ चालान से जोड़कर देखते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि दुर्घटना किसी को बताकर नहीं आती एक छोटी सी लापरवाही जिंदगी और मौत के बीच की दूरी बन जाती है इसी को देखते हुए जिले के पुलिस अधीक्षक श्री सियाज के. एम ने जिले के आम नागरिकों से लेकर हर व्यक्ति तक अपील की है कि अगर हम अपने परिवार को सुरक्षित और खुशहाल देखना चाहते हैं तो हमें सड़क पर जिम्मेदार नागरिक बनकर उतरना होगा उन्होंने कहा है कि हमें आरोप-प्रत्यारोप के दौर में नहीं पड़ना है बल्कि अपनी सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी बनाना है अगर दोपहिया वाहन में हैं तो हेलमेट जरूर लगाइए, अगर चारपहिया वाहन में हैं तो सीट बेल्ट का उपयोग जरूर कीजिए, शराब पीकर बिल्कुल वाहन मत चलाइए और ट्रैफिक नियमों का पालन कीजिए क्योंकि हादसे के बाद सिर्फ खबरें बनती हैं, लेकिन दर्द पूरा परिवार सहता है हमें दूसरों को बदलने से पहले खुद को बदलना है अगर हमारी सोच बदलेगी तो हमारा परिवार सुरक्षित रहेगा, समाज सुरक्षित रहेगा और निश्चित रूप से हमारा सिंगरौली भी बदलेगा घर से निकलो तो सिर्फ सफर के लिए नहीं, सुरक्षित वापस लौटने के लिए निकलो












