जंगलराज” का आरोप! कटनी में सरकारी जमीन पर कब्जा, पेड़ों की कटाई और प्रशासन की चुप्पी ने खड़े किए बड़े सवाल
जंगलराज” का आरोप! कटनी में सरकारी जमीन पर कब्जा, पेड़ों की कटाई और प्रशासन की चुप्पी ने खड़े किए बड़े सवाल

✍️ मनोज सिंह परिहार की रिपोर्ट
कटनी। जिले की जनपद बड़वारा अंतर्गत ग्राम पंचायत परसेल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और हरे-भरे पेड़ों की कटाई को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतों और सबूतों के बावजूद अब तक कार्रवाई न होना “मिलीभगत” के आरोपों को हवा दे रहा है।
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि विपिन कुमार असाटी (पिता—नोनेलाल असाटी) ने खसरा नंबर 1324 की शासकीय भूमि पर लगभग 2000 वर्गफीट क्षेत्र में अवैध कब्जा कर आलीशान पक्का मकान खड़ा कर लिया बताया जा रहा है कि निर्माण से पहले वहां मौजूद करीब 5 हरे-भरे पेड़ों को बिना अनुमति काट दिया गया शिकायतकर्ता मुकेश कुमार गुप्ता का कहना है कि उनके पास इस पूरे मामले के फोटो, खसरा दस्तावेज और पूर्व शिकायतों की प्रतियां मौजूद हैं—फिर भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतों के बाद भी “सन्नाटा”
पीड़ित का दावा है कि उन्होंने कई बार—स्थानीय राजस्व अधिकारियों जनपद पंचायत कार्यालय ग्राम पंचायत साप्ताहिक जनसुनवाई में कलेक्टर व एसडीएम को लिखित शिकायतें सौंपीं इसके बावजूद न अतिक्रमण हटाया गया, न ही पेड़ों की कटाई पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई। आरोप यह भी है कि अधिकारियों ने केवल आश्वासन देकर मामले को टाल दिया, जबकि अंदरखाने “मोटी रकम लेकर मामला दबाने” की चर्चा है।
सरकारी अभियान बनाम जमीनी हकीकत
एक ओर सरकार “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर खुलेआम पेड़ों की कटाई और सरकारी जमीन पर कब्जा प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहा है यह विरोधाभास सीधे तौर पर सिस्टम की नीयत और निगरानी पर सवाल खड़ा करता है।
कानून क्या कहते हैं?
इस मामले में कई सख्त कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं—मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 – शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने का अधिकार Indian Forest Act, 1927 – बिना अनुमति पेड़ काटना अपराध Environment Protection Act, 1986 – पर्यावरण को नुकसान पर कार्रवाई Indian Penal Code की धारा 447 व 427 – अतिक्रमण और संपत्ति नुकसान दंडनीय अपराध इन कानूनों के तहत तत्काल एफआईआर, अतिक्रमण हटाने और नुकसान की भरपाई कराई जा सकती है।
सबूत हैं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
मामले में—
अवैध निर्माण की तस्वीरें ,खसरा दस्तावेज (1324) शिकायतों की प्रतियां
सब कुछ मौजूद है, फिर भी कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े कर रहा है।
सीधे सवाल प्रशासन से
क्या अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है? पेड़ों की कटाई को नजरअंदाज क्यों किया गया?
बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह पूरा मामला मिलीभगत की ओर इशारा करता है?
शिकायतकर्ता की मांग पीड़ित ने मांग की है कि—
राजस्व, वन विभाग और पंचायत की संयुक्त जांच हो तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए
पेड़ कटाई पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो ,जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर पब्लिक रिपोर्ट जारी की जाएगी
यह मामला सिर्फ अतिक्रमण का नहीं, बल्कि कानून के राज बनाम सिस्टम की निष्पक्षता की परीक्षा है 👉 अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं—क्या सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?













