“निरीक्षण के नाम पर दिखावा या सच से भागता सिस्टम?” 60% दिव्यांग का दावा, लेकिन मैदान में ‘फुल एक्टिव’ अफसर—कलेक्टर के दौरे में उठा बड़ा सवाल!
“निरीक्षण के नाम पर दिखावा या सच से भागता सिस्टम?” 60% दिव्यांग का दावा, लेकिन मैदान में ‘फुल एक्टिव’ अफसर—कलेक्टर के दौरे में उठा बड़ा सवाल!

मनोज सिंह परिहार की रिपोर्ट
जिले में उद्योगों के निरीक्षण पर निकले कलेक्टर आशीष तिवारी विकास, निवेश और रोजगार की बड़ी-बड़ी बातें करते नजर आए। लेकिन इस पूरे दौरे के बीच एक ऐसा चेहरा सामने आया, जिसने प्रशासन की पारदर्शिता पर ही सवाल खड़े कर दिए उद्योग विभाग में सहायक प्रबंधक के पद पर पदस्थ राजेश पटेल—जिनका रिकॉर्ड 60% दिव्यांग होने का दावा करता है—वहीं मौके पर कलेक्टर के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते, निरीक्षण करते और पूरी तरह सक्रिय नजर आए। अब सवाल सीधा है—क्या कागजों में दिव्यांगता और जमीन पर सक्रियता का यह फर्क महज संयोग है या सिस्टम की मिलीभगत?
सबसे बड़ा सवाल कलेक्टर से—
क्या आपको यह विरोधाभास दिखाई नहीं दिया, या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
और सवाल राजेश पटेल से—
आपके 60% दिव्यांग होने का आधार क्या है? क्या इसकी निष्पक्ष जांच हुई? अगर हुई तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?
यह मामला सिर्फ एक अधिकारी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख का है।
क्या नियम सिर्फ गरीबों और कमजोरों के लिए हैं? क्या जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जांच से ऊपर हैं?
अब जनता जवाब मांग रही है—
या तो सच्चाई सामने लाई जाए, या फिर यह मान लिया जाए कि कहीं न कहीं बड़ा खेल चल रहा है!
अगर प्रशासन अब भी चुप रहा… तो सवाल और भी तीखे होंगे, और आवाज भी और बुलंद होगी!
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