कबाड़ दुकान या ‘क्राइम हब’? उमाकांत शुक्ला और गिरोह चोरी का माल, डीजल का खेल और प्रशासन खामोश! सिंगरौली में कबाड़ नेटवर्क बेखौफ
कबाड़ दुकान या ‘क्राइम हब’? उमाकांत शुक्ला और गिरोह चोरी का माल, डीजल का खेल और प्रशासन खामोश! सिंगरौली में कबाड़ नेटवर्क बेखौफ

सिंगरौली जिले के नवानगर थाना क्षेत्र में संचालित एक कबाड़ दुकान को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कबाड़ के इस कारोबार की आड़ में चोरी, लूट और खदानों से डीजल की अवैध निकासी जैसे संगठित अपराधों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आरोपों के केंद्र में कबाड़ कारोबारी उमाकांत शुक्ला और उसका कथित गिरोह है, जिस पर लंबे समय से अवैध गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप लगते रहे हैं खदानों से डीजल चोरी का नेटवर्क, कबाड़ दुकान बनी खपत का जरिया सूत्रों के अनुसार, आसपास संचालित कोयला खदानों से डीजल चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। चोरी किया गया डीजल और अन्य सामग्री कथित तौर पर कबाड़ दुकान के माध्यम से खपाई जाती है। यह नेटवर्क इतना संगठित बताया जा रहा है कि इसमें कई लोग मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे सरकारी संसाधनों को सीधा नुकसान हो रहा है स्थानीयों का आरोप: ‘कबाड़ दुकान नहीं, अपराध का अड्डा’ नवानगर क्षेत्र के रहवासियों का कहना है कि संबंधित कबाड़ दुकान में देर रात तक संदिग्ध गतिविधियां चलती रहती हैं। यहां बाहरी लोगों की आवाजाही, अज्ञात वाहनों का आना-जाना और चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त जैसी गतिविधियां आम बात हो गई हैं लोगों का कहना है कि यह दुकान अब कबाड़ का केंद्र नहीं, बल्कि अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना बन चुकी है चोरी-लूट की बढ़ती घटनाओं से जुड़ रहे तार क्षेत्र में पिछले कुछ समय से चोरी, लूट और कबाड़ से जुड़े अपराधों में तेजी आई है जानकारों का मानना है कि ऐसे कबाड़ नेटवर्क अपराधियों को संरक्षण देते हैं, जहां चोरी का माल आसानी से खप जाता है इससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हो रहे हैं और अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है प्रशासन पर सवाल: कार्रवाई क्यों नहीं? सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिला प्रशासन और पुलिस इस पूरे मामले में अब तक सख्त कदम क्यों नहीं उठा पाए हैं।
क्या पुलिस को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कानूनी प्रावधानों की अनदेखी
नियमों के अनुसार कबाड़ कारोबारियों को खरीदे जाने वाले सामान का पूरा रिकॉर्ड रखना होता है और संदिग्ध वस्तुओं की सूचना पुलिस को देना अनिवार्य है। लेकिन आरोप है कि इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।
जनता की मांग: जांच और सख्त कार्रवाई हो स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि: क्षेत्र में संचालित सभी कबाड़ दुकानों की जांच कराई जाए अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई हो
खदानों से हो रही डीजल चोरी पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए बड़ा सवाल: कब जागेगा प्रशासन? सिंगरौली जैसे औद्योगिक जिले में अगर कबाड़ के नाम पर इस तरह का संगठित अपराध फल-फूल रहा है, तो यह कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।













