बड़ेरा में भू-माफिया का कब्जा कांड: महिला प्रशिक्षण केंद्र पर अवैध कब्जा, रिकॉर्ड में हेराफेरी के आरोप—प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
बड़ेरा में भू-माफिया का कब्जा कांड: महिला प्रशिक्षण केंद्र पर अवैध कब्जा, रिकॉर्ड में हेराफेरी के आरोप—प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

सरपंच की शिकायतें बेअसर, पटवारी-तहसीलदार पर मिलीभगत के आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश
कटनी : मनोज सिंह परिहार
कटनी जिले की ग्राम पंचायत बड़ेरा में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का बड़ा मामला सामने आया है, जहां भू-माफिया के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि वर्षों पुराना सरकारी महिला प्रशिक्षण केंद्र अब अवैध कब्जे की जद में है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 35 से 40 वर्ष पहले सरकारी खर्च से निर्मित महिला प्रशिक्षण केंद्र, जो महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक था, आज कथित रूप से भू-माफिया विजय पटेल के कब्जे में पहुंच गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि शासकीय दर्ज थी, लेकिन वर्तमान रिकॉर्ड में निजी नाम दर्ज कर दिया गया है। इस पूरे मामले में पटवारी और तहसीलदार की मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं आरोप यह भी है कि कब्जे को वैध दिखाने के लिए भवन में एक परिवार को बसाया गया है, ताकि यह निजी संपत्ति प्रतीत हो। वहीं, मौके पर तेजी से बाउंड्री वॉल का निर्माण किया जा रहा है और पुरानी सरकारी संरचना को तोड़कर नया निर्माण कराया जा रहा है। ग्राउंड रिपोर्ट और वीडियो साक्ष्य इस निर्माण कार्य की पुष्टि कर रहे हैं मामले ने तूल तब पकड़ा जब ग्राम पंचायत बड़ेरा के सरपंच विजय संजो पटेल स्वयं ग्रामीणों के साथ सामने आए और खुलकर आरोप लगाए। सरपंच का कहना है कि संबंधित भूमि पूरी तरह शासकीय है, लेकिन रिकॉर्ड में हेराफेरी कर निजी नाम दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है, जिससे भू-माफिया के हौसले और बढ़ गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सरपंच की शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं हो रही, तो आम जनता न्याय के लिए कहां जाए यह मामला अब प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अधिकारियों की चुप्पी इस पूरे प्रकरण में उनकी संलिप्तता की ओर इशारा कर रही है, या फिर दबाव और लेनदेन के चलते कार्रवाई रोकी जा रही है अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कब संज्ञान लेकर अवैध कब्जे को हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, या फिर बड़ेरा में सरकारी जमीन पर कब्जे का यह खेल यूं ही जारी रहेगा।













