कटनी में खरीदी केंद्र बना ‘लूट का अड्डा’? 50 किलो पर 570 ग्राम कटौती और प्रति क्विंटल वसूली से किसान बेहाल
कटनी में खरीदी केंद्र बना ‘लूट का अड्डा’? 50 किलो पर 570 ग्राम कटौती और प्रति क्विंटल वसूली से किसान बेहाल

कटनी :आनंद दाहिया
कटनी जिले के विजयराघवगढ़ क्षेत्र स्थित कांटी-अमाड़ी क्रमांक-2 खरीदी केंद्र से सामने आई तस्वीरें और आरोप सरकारी दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। जहां एक ओर प्रदेश सरकार किसानों के हित में योजनाओं और पारदर्शी खरीदी व्यवस्था की बात करती है, वहीं जमीनी स्तर पर किसानों के साथ खुलेआम शोषण किए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं सबसे बड़ा आरोप तौल में गड़बड़ी को लेकर है। किसानों का कहना है कि यहां 50 किलो गेहूं की जगह 50 किलो 570 ग्राम तौल कराई जा रही है। यानी हर बोरी पर सीधे-सीधे कटौती, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है इस पूरे मामले के केंद्र में खरीदी प्रभारी अनमोल दुबे का नाम सामने आ रहा है। किसानों का आरोप है कि प्रभारी द्वारा खुलेआम यह कहा जा रहा है कि “ऊपर तक सेटिंग है”, जिससे उनके हौसले और भी बुलंद हैं मामला यहीं नहीं रुकता। किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रति क्विंटल 30 रुपए की अवैध वसूली की जा रही है। जो किसान पैसे देने से इनकार करता है, उसका गेहूं रिजेक्ट कर दिया जाता है। मजबूरी में किसान या तो भुगतान करते हैं या फिर कई दिनों तक खरीदी केंद्र के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं खरीदी केंद्र की अव्यवस्था भी हालात को और बदतर बना रही है। भीषण गर्मी के बीच किसानों के लिए न तो बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही छांव या शेड उपलब्ध है। पीने के पानी तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से अन्नदाता को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले की शिकायत एसडीएम विजयराघवगढ़ तक पहुंच चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उपलब्ध वीडियो में तौल की गड़बड़ी स्पष्ट दिखाई देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है अब बड़ा सवाल यही है कि क्या किसानों के सम्मान की बात सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या अधिकारियों की मिलीभगत से ही इस तरह का भ्रष्टाचार पनप रहा है? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला केवल एक खरीदी केंद्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करेगा। फिलहाल अन्नदाता लाइन में खड़ा है… लेकिन न्याय अब भी दूर नजर आ रहा है।













