“गाड़ी जला दो, मेरा कुछ नहीं होगा” नवानगर थाना की छाया में कार मालिक
गाड़ी जला दो, मेरा कुछ नहीं होगा” नवानगर थाना की छाया में कार मालिक

सिंगरौली , भूपेंद्र पाडे
सिंगरौली। DAV पब्लिक स्कूल कृष्णबिहार–मेडिकल कॉलेज मार्ग पर हुई सड़क दुर्घटना अब महज़ हादसा नहीं रह गई है, बल्कि पुलिस की भूमिका और कानून की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। एक गरीब परिवार का इकलौता सहारा आज अस्पताल में ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा है, जबकि दूसरी ओर कथित तौर पर कार मालिक का रसूख और थाने से “सेटिंग” की बातें सामने आ रही हैं प्राप्त जानकारी के अनुसार, सड़क किनारे खड़ी बाइक से चाबी निकाल रहे युवक को तेज़ रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि युवक के पिता पहले ही नहीं हैं और घर की पूरी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। आज वही बेटा अस्पताल के बिस्तर पर पड़ा है, और परिवार इलाज के खर्च के लिए दर-दर भटक रहा है पीड़ित परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद जब उन्होंने कार मालिक से इलाज और न्याय की बात की, तो कथित तौर पर उन्हें धमकी भरे और अमानवीय जवाब मिले। परिजनों के अनुसार, कार मालिक ने कहा—
“मैं रीवा में हूं… गाड़ी को खा लो, आग लगा दो… जो करना है कर लो।”
यहां तक कि यह भी कहा गया कि “नवानगर थाना प्रभारी से बात हो गई है, रिश्तेदारी है—मेरा कुछ नहीं होगा।”
इन आरोपों के बीच यह भी सामने आया कि कार मालिक ने अपने ही ड्राइवर को गालियां देकर खुद को ईमानदार साबित करने का ढोंग किया, जबकि घायल युवक अस्पताल में तड़पता रहा।
जनाक्रोश और चक्का जाम
प्रशासनिक उदासीनता के आरोपों से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने सुबह 6 बजे से चक्का जाम किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब पुलिस और प्रशासन खामोश हो जाएं, तब जनता को सड़क पर उतरकर न्याय की गुहार लगानी पड़ती है।
उठते सवाल
▪️ क्या गरीब के इलाज से पहले बीमा और रसूख ज्यादा अहम हो गए हैं?
▪️ क्या थाने से “सेटिंग” हो जाए तो कानून बौना पड़ जाता है?
▪️ क्या चक्का जाम करना ही अब इंसाफ पाने का आखिरी रास्ता है?
स्थानीय लोगों ने आदरणीय पुलिस अधीक्षक से मामले में तत्काल संज्ञान लेने और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे तत्व न केवल अमीरों को संरक्षण देते हैं, बल्कि खाकी वर्दी की गरिमा को भी शर्मसार करते हैं।












