फर्जी दस्तावेज़, नकली हस्ताक्षर, खुलेआम रजिस्ट्री — FIR तक नहीं!
सिंगरौली में जमीन माफिया बेलगाम, जिला प्रशासन बेखबर या बेबस?

सिंगरौली। जिले में जमीन दलाली और फर्जीवाड़े का ऐसा संगठित खेल चल रहा है, जिसने कानून-व्यवस्था, पुलिस तंत्र और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर कार्यालय से लेकर थानों तक बार-बार लिखित शिकायतें देने के बावजूद न एफआईआर, न गिरफ्तारी और न ही ठोस जांच—यह हालात प्रशासनिक निष्क्रियता की जीती-जागती मिसाल बन चुके हैं।
शिकायतें ढेरों, कार्रवाई शून्य
पीड़ित द्वारा दिए गए लिखित आवेदन में स्पष्ट आरोप हैं कि जमीन हड़पने के नाम पर फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए गए, नकली नामांतरण और सीमांकन के कागजात बनाए गए, यहां तक कि हस्ताक्षर भी कंप्यूटर से गढ़े गए। बावजूद इसके, कोतवाली थाना हो या अन्य संबंधित कार्यालय—कहीं भी आज तक न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई।
नामांतरण-सीमांकन में खेल, रिकॉर्ड पर सवाल
30 जनवरी 2026 को फर्जी नामांतरण/वारिसाना और सीमांकन के कागजात को लेकर थाना स्तर पर आवेदन दिया गया। इसके बाद भी पुलिस ने आंखें मूंदे रखीं। 25 फरवरी 2026 को नगरीय/अनार्य क्षेत्र की नामांतरण पंजिका का कथित नकली रिकॉर्ड सामने आया, जिसमें पीड़ित के हस्ताक्षर तक नहीं थे—फिर भी मामला ठंडे बस्ते में।
जेल–जमानत का खेल, रसूखदार बेखौफ
आरोप है कि फर्जीवाड़े में शामिल कुछ लोग जेल गए, फिर जमानत पर बाहर आ गए; कुछ अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। जिनके खिलाफ इनाम तक घोषित होने की बात कही गई, वे भी बेखौफ हैं। सवाल उठता है—जब आरोपी जिले से दूर बताए जाते हैं, तो उनके रिश्तेदारों व नेटवर्क पर शिकंजा क्यों नहीं?
पुलिस–प्रशासन की चुप्पी, किसका संरक्षण?
इतनी गंभीर शिकायतों पर भी एफआईआर दर्ज न होना, जांच का न बढ़ना और कार्रवाई का अभाव—क्या यह लापरवाही है या किसी बड़े संरक्षण का संकेत? पीड़ित का आरोप है कि पूरे मामले के पीछे “बड़ा राज” छिपा है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
क्या जिला प्रशासन जमीन माफिया के सामने नतमस्तक है?
फर्जी दस्तावेज़ों की फैक्ट्री किसके संरक्षण में चल रही है?
पीड़ित को न्याय कब मिलेगा—या फाइलें यूं ही धूल फांकती रहेंगी?
पीड़ित ने कलेक्टर से मांग की है कि पत्र प्राप्त होते ही संबंधित थाने को तत्काल एफआईआर दर्ज करने, कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाएं—ताकि आम जनता का भरोसा बहाल हो।
सिंगरौली में जमीन माफिया के हौसले बुलंद हैं और प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन जागता है या यह मामला भी कागज़ों में ही दबकर रह जाता है।












