“खुद को हरिश्चंद्र समझने वाले ‘समाजसेवी’ पर सवालों की बौछार: कांग्रेस के बैनर तले बैठा नेता, मगर जिले की हर व्यवस्था उसे गलत क्यों दिखती है?”
“खुद को हरिश्चंद्र समझने वाले ‘समाजसेवी’ पर सवालों की बौछार: कांग्रेस के बैनर तले बैठा नेता, मगर जिले की हर व्यवस्था उसे गलत क्यों दिखती है?”

सिंगरौली : जिले में कांग्रेस के बैनर तले एक जिम्मेदार पद पर बैठे नेता भास्कर मिश्रा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, खुद को सबसे बड़ा समाजसेवी और ईमानदारी का पैमाना बताने वाले इस नेता की नजर में जिले के एसपी, कलेक्टर, आईजी, डीआईजी भोपाल—यहां तक कि जनप्रतिनिधि भी—सब गलत हैं। अगर कोई “सही” है, तो वह सिर्फ और सिर्फ भास्कर मिश्रा—ऐसा उनका दावा बताया जा रहा है लेकिन इसी दावे के समानांतर सूत्र यह भी बताते हैं कि भास्कर मिश्रा के खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में अपराध पंजीबद्ध होने के आरोप हैं। इतना ही नहीं, दो-दो बार जिला बदर से जुड़े मामलों में नाम आने की चर्चाएं भी हैं। सवाल यह है कि समाज सेवा के नाम पर मंचों से नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले नेता की अपनी जमीन पर यह विरोधाभास क्यों सूत्रों का कहना है कि “समाज सेवा” की आड़ में एक ऐसा ढांचा खड़ा किया गया है, जिसके तौर-तरीकों पर अब परत-दर-परत सवाल उठ रहे हैं। जिले में कथित रूप से सक्रिय गैंग, दबदबा बनाने के तरीके और सत्ता-समीकरण—इन सब पर पर्दा डालकर खुद को पाक-साफ बताने की कोशिश कितनी टिकाऊ है? अनोखी कल्पना न्यूज़ नेटवर्क इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का प्रयास कर रहा है फिलहाल, विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर इतना तय है कि कहानी सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है।
शेष अगले अंक में—बताएंगे कि “समाज सेवा” के ये तौर-तरीके क्या हैं, कथित नेटवर्क कैसे काम करता है और जिले में इसका असर किस हद तक बताया जा रहा है।












