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सिंगरौली नशे की गिरफ्त में: युवा बन रहे चोर, घरों की दीवारें टूट रहीं और प्रशासन मौन”

हर 50 मीटर पर नशा, हर घर में डर: सिंगरौली में ड्रग्स माफिया का बेखौफ राज”

सिंगरौली — जिला आज केवल नशे का गढ़ ही नहीं बन चुका, बल्कि नशे की लत से उपजे अपराधों का केंद्र भी बनता जा रहा है। नशे की ओर आकर्षित आज का युवा वर्ग अब केवल खुद को बर्बाद नहीं कर रहा, बल्कि समाज और कानून-व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन चुका है। हालात इतने भयावह हो गए हैं कि नशा न मिलने की स्थिति में युवा चोरी, सेंधमारी और लूट जैसे अपराधों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।

जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां नशे के आदी युवक अपने ही घरों के बर्तन, गैस सिलेंडर, लोहे का सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुएं चुपचाप उठाकर बाजारों में औने-पौने दामों में बेच रहे हैं। कई परिवारों ने तो यह भी बताया कि उनके घरों की दीवारें तक तोड़ दी गईं, पीछे से सेंध लगाकर अंदर घुसा गया और कीमती सामग्री, नकदी, मोबाइल, आभूषण तक चोरी कर लिए गए।

चोरी के पीछे वजह एक ही—नशा।

जो भी पैसे हाथ लगते हैं, उसी पल नशीली दवाइयां और नशीले पदार्थ खरीद लिए जाते हैं। इसके बाद वही युवक नशे की हालत में सड़कों पर बेपरवाह घूमते दिखाई देते हैं—कभी लड़खड़ाते हुए, कभी राहगीरों से उलझते हुए, तो कभी किसी अनहोनी को अंजाम देने की स्थिति में।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह सब खुलेआम हो रहा है। मोहल्लों के लोग सब कुछ देख रहे हैं, लेकिन डर और असहायता के कारण आवाज उठाने से बच रहे हैं। माता-पिता अपने ही बच्चों से भयभीत हैं। घरों में ताले और ग्रिल बढ़ रहे हैं, लेकिन नशे का जाल टूट नहीं रहा।

यह स्थिति अचानक नहीं बनी। इसके पीछे वही पुरानी कहानी है—ड्रग्स माफिया और नशा माफिया का बेलगाम नेटवर्क, जिसे न प्रशासन का डर है और न कानून का खौफ। हर 50 मीटर पर नशे की उपलब्धता ने युवाओं को अपराध की फैक्ट्री में बदल दिया है। सवाल यह है कि जब नशा बिक रहा है, जब खुलेआम सौदे हो रहे हैं, तो आखिर जिम्मेदार कौन है?

जब हालात बेकाबू होते हैं, तब प्रशासन कभी-कभार छोटी-मोटी कार्रवाई कर यह संदेश देता है कि वह सक्रिय है। कुछ गिरफ्तारी, कुछ औपचारिक छापे—और फिर सब कुछ पहले जैसा। माफिया दोबारा और ज्यादा मजबूती के साथ मैदान में उतर आते हैं। इससे यह संदेश साफ जाता है कि या तो प्रशासन असहाय है, या फिर किसी न किसी रूप में संरक्षण दिया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के “नशा मुक्त समाज” के दावे सिंगरौली में खोखले नजर आते हैं। यहां नशा युवाओं का भविष्य निगल रहा है, परिवारों की नींव हिला रहा है और अपराध को जन्म दे रहा है। अगर आज सख्त और निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह होगी—जहां हर चोरी के पीछे नशा होगा और हर गली में असुरक्षा।

यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, यह सिंगरौली की आने वाली पीढ़ी के अस्तित्व का सवाल है। अब भी यदि प्रशासन नहीं जागा, तो इतिहास यही लिखेगा कि सिंगरौली को नशे ने नहीं, बल्कि चुप्पी ने बर्बाद किया।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

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अजय शर्मा | प्रधान संपादक

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