अस्पताल बना मज़ाक! डॉक्टर गायब, मरीज तड़पते रहे — कलेक्टर का डंडा चला, तीन डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस”
ओपीडी में कुर्सियां खाली, मरीज लाइन में बेहाल; जवाब न देने पर एक साल की वेतन वृद्धि रोकने की

मऊगंज जिले का सिविल अस्पताल इन दिनों इलाज का नहीं, बल्कि लापरवाही और गैरजिम्मेदारी का अड्डा बनता जा रहा है। जिन डॉक्टरों पर मरीजों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, वही ड्यूटी के समय अस्पताल से गायब मिल रहे हैं और गरीब मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं हालात इतने बदतर थे कि ओपीडी के समय अस्पताल में मरीजों की लंबी कतारें लगी थीं, लेकिन जिन डॉक्टरों को वहां मौजूद होना चाहिए था, उनकी कुर्सियां खाली पड़ी थीं। दूर-दराज गांवों से उम्मीद लेकर आए मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन डॉक्टर साहबों का कहीं अता-पता नहीं था लगातार मिल रही शिकायतों के बाद डिप्टी कलेक्टर पवन गौरैया ने सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी पोल खोलकर रख दी। ओपीडी में तैनात डॉक्टर कुमुद पाठक और रुपेश वर्मा ड्यूटी से नदारद मिले। इतना ही नहीं, अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी बीएमओ डॉ. प्रद्युम्न शुक्ला भी बिना किसी सूचना या स्वीकृत अवकाश के गायब पाए गए जैसे ही यह रिपोर्ट कलेक्टर संजय जैन के पास पहुंची, उन्होंने सख्त तेवर दिखाते हुए तीनों डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। कलेक्टर ने साफ कहा कि ड्यूटी के समय अस्पताल से गायब रहना सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि गरीब मरीजों के साथ सीधा अन्याय है कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि यदि डॉक्टरों का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और एक वर्ष की वेतन वृद्धि रोक दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का सीधा उल्लंघन है दरअसल, अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और डॉक्टरों की लापरवाही को लेकर मीडिया में लगातार खबरें सामने आ रही थीं। जनता की आवाज जब तेज हुई, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया और औचक निरीक्षण के जरिए सच्चाई उजागर हो गई अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ नोटिस और चेतावनी से व्यवस्था सुधर जाएगी, या फिर कुछ दिन बाद फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी—डॉक्टर गायब और मरीज बेहाल फिलहाल प्रशासन की इस सख्ती से लोगों में उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन जनता का कहना है कि अगर अस्पताल में इलाज चाहिए, तो सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि लापरवाह डॉक्टरों पर कड़ी और उदाहरण पेश करने वाली कार्रवाई भी जरूरी है।












