मोरवा में ट्रांसफर पर बवाल: “कपूर त्रिपाठी की वापसी होगी या नहीं?”— हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर
मोरवा में ट्रांसफर पर बवाल: “कपूर त्रिपाठी की वापसी होगी या नहीं?”— हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर

सिंगरौली | मोरवा | अजय शर्मा
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के मोरवा थाना से जुड़ा एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। मोरवा थाना प्रभारी रहे कपूर त्रिपाठी का अचानक मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी, भोपाल ट्रांसफर कर दिया गया, और इसके तुरंत बाद जिले के एसपी मनीष खत्री द्वारा उन्हें जिले से रिलीव भी कर दिया गया। इतना ही नहीं, उन्हें प्रशासनिक ग्रुपों से भी हटा दिया गया — जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है
ढाई महीने का कार्यकाल, और अचानक विदाई
मोरवा जैसे संवेदनशील थाना क्षेत्र में कपूर त्रिपाठी का कार्यकाल महज ढाई महीने का रहा, लेकिन इस दौरान उनकी कार्यशैली को लेकर क्षेत्र में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अचानक हुए इस ट्रांसफर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब मामला पहुंचा हाई कोर्ट जबलपुर
ट्रांसफर और रिलीव किए जाने के फैसले के खिलाफ कपूर त्रिपाठी ने हाई कोर्ट जबलपुर में याचिका दायर कर दी है और स्टे (स्थगन आदेश) की मांग की है। हालांकि, याचिका दायर होने के तुरंत बाद दो दिन की छुट्टियां पड़ गईं, जिससे सुनवाई टल गई।
👉 अब सबकी नजरें सोमवार पर टिकी हैं, जब कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी है।
🔄 इस बीच मोरवा की कमान किसके हाथ?
कपूर त्रिपाठी के हटते ही मोरवा थाने की कमान ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को सौंप दी गई है, जो इससे पहले जियावान थाना प्रभारी रह चुके हैं।
तीन बड़े सवाल जो बना रहे हैं माहौल गरम:
क्या कपूर त्रिपाठी को हाई कोर्ट से राहत मिलेगी? क्या उन्हें फिर से मोरवा थाना प्रभारी बनाया जाएगा?
या फिर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की तैनाती स्थायी हो जाएगी?
जनता में चर्चा तेज, सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब सिंगरौली में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कोई इसे प्रशासनिक सख्ती बता रहा है, तो कोई इसे अंदरूनी खींचतान का नतीजा मान रहा है।
अब फैसला अदालत के हाथ में
फिलहाल, इस पूरे मामले का भविष्य हाई कोर्ट के फैसले पर टिका हुआ है। सोमवार की सुनवाई न सिर्फ कपूर त्रिपाठी के करियर बल्कि मोरवा थाने की कमान पर भी बड़ा असर डाल सकती है
देखना दिलचस्प होगा — “वापसी” होती है या “विदाई” पर ही लगती है मुहर!













