खबरमध्य प्रदेशसिंगरौली

“विकास या विनाश? सिंगरौली के NTPC विंध्यनगर पर उठते गंभीर सवाल, अब सूचना तंत्र भी कटघरे में”

प्रदूषण, विस्थापन, बेरोजगारी के साथ अब पारदर्शिता और मीडिया भेदभाव के आरोप भी तेज

सिंगरौली (मध्य प्रदेश) | अजय शर्मा

देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाली NTPC विंध्यनगर परियोजना अब सिर्फ पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सूचना तंत्र और पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर विवादों में घिरती नजर आ रही है जहां एक ओर कंपनी विकास के बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत लगातार सवाल खड़े कर रही है

सूचना देने से कतराते अधिकारी आखिरकार कौन है जिम्मेदार ?

परियोजना से जुड़ी जानकारी हासिल करना अब आम लोगों और पत्रकारों के लिए आसान नहीं रहा आरोप है कि NTPC से संबंधित जानकारी मांगने पर कई अधिकारी फोन तक रिसीव नहीं करते पारदर्शिता की कमी को लेकर स्थानीय पत्रकारों में नाराजगी जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल यह स्थिति एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के लिए चिंताजनक मानी जा रही है।

एनटीपीसी पीआरो पर गंभीर आरोप?

NTPC विंध्यनगर के जनसंपर्क अधिकारी शंकर पर भी पक्षपात के आरोप लगे हैं चुनिंदा पत्रकारों को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित करने का आरोप मीडिया के बीच भेदभाव की चर्चा तेज स्वतंत्र और छोटे पत्रकारों की लगातार अनदेखी श्रमजीवी पत्रकार जन कल्याण परिषद जैसे पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह न केवल पत्रकारिता के मूल्यों के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी सीधा प्रहार है।

पत्रकार संगठन का ऐलान: अब आर-पार की लड़ाई?

श्रमजीवी पत्रकारिका जन कल्याण परिषद ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है NTPC के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की तैयारी ,

जनसंपर्क अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग” पारदर्शी सूचना व्यवस्था लागू करने की मांग

संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि:

👉 यदि जिला स्तर पर समाधान नहीं हुआ, तो मामला सीधे NTPC के केंद्रीय कार्यालय (दिल्ली) तक ले जाया जाएगा।

प्रशासनिक चुप्पी पर भी सवाल?

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद स्थानीय प्रशासन और NTPC प्रबंधन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है

NTPC विंध्यनगर सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन से जुड़ा मुद्दा है अब सवाल सिर्फ बिजली उत्पादन का नहीं, बल्कि

👉 पर्यावरण 👉 सामाजिक न्याय 👉 और पारदर्शिता तीनों के संतुलन का है।

यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह मामला सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन सकता है।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

anokhikalpana

अजय शर्मा | प्रधान संपादक

✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button