डगा में जमीन विवाद का ‘काला खेल’ बेनकाब: वैध जमीन को शासकीय बताकर दलाली की साजिश, जांच में खुली पोल
डगा में जमीन विवाद का ‘काला खेल’ बेनकाब: वैध जमीन को शासकीय बताकर दलाली की साजिश, जांच में खुली पोल

सिंगरौली | बरगवां (डगा)
सिंगरौली जिले के बरगवां क्षेत्र के ग्राम डगा में जमीन विवाद का मामला अब एक बड़े खुलासे के साथ सुर्खियों में आ गया है। यह मामला सिर्फ एक साधारण भूमि विवाद नहीं, बल्कि लालच, दलाली और झूठी शिकायतों के जरिए प्रशासन को गुमराह करने की कथित साजिश के रूप में सामने आया है मामले के केंद्र में हैं सिंगरौली के मूल निवासी राजकुमार विश्वकर्मा, जिन्होंने आर्थिक तंगी के चलते अपनी निजी जमीन साहू जी को बेच दी थी। लेकिन इस सौदे के बाद जो हुआ, उसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया दलाली के लिए रची गई ‘शासकीय जमीन’ की कहानी? सूत्रों के अनुसार, राजासरई निवासी भरत सिंह ने इस जमीन को शासकीय भूमि बताकर पहले शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि यह सब दलाली के उद्देश्य और पैसे के लालच में किया गया, ताकि सौदे में अपनी हिस्सेदारी तय कर सकें
राजस्व टीम की जांच में सच्चाई आई सामने
शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए टीम गठित की। कई पटवारियों की मौजूदगी में मौके पर जाकर:
जमीन की नाप-जोख (नापीकरण) की गई दस्तावेजों का मिलान किया गया और विस्तृत स्थल पंचनामा तैयार किया गया जांच के बाद साफ हो गया कि विवादित भूमि शासकीय नहीं, बल्कि पूरी तरह से राजकुमार विश्वकर्मा के पट्टे की निजी जमीन है सामूहिक हस्ताक्षर से भी भागे, फिर सोशल मीडिया पर हमला सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके पर मौजूद भरत सिंह को जब पंचनामा पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, तो उन्होंने साफ मना कर दिया लेकिन कुछ ही घंटों बाद वही भरत सिंह फेसबुक पर भ्रामक और भड़काऊ पोस्ट डालकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करने लगे, जबकि सच्चाई उनके सामने ही उजागर हो चुकी थी
20% कमीशन नहीं तो शिकायत? गंभीर आरोप
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि भरत सिंह की कार्यप्रणाली लंबे समय से विवादों में रही है। आरोप है कि:
क्षेत्र में होने वाली जमीन खरीद-फरोख्त में वे 20% तक कमीशन की मांग करते हैं और जो उनकी मांग नहीं मानता, उसके खिलाफ झूठी शिकायतें अफवाहें
और सोशल मीडिया पर बदनाम करने का अभियान शुरू कर देते हैं
प्रशासन पर सवाल या सच्चाई से भागना? यह पूरा घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
👉 क्या निजी स्वार्थ के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को बदनाम करना अब आसान हो गया है?
👉 क्या सोशल मीडिया का इस्तेमाल सच्चाई छुपाने और भ्रम फैलाने का हथियार बनता जा रहा है? डगा का यह मामला साफ दिखाता है कि जांच के बाद भी झूठ का सहारा लेकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है अब जरूरत है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत लालच के लिए प्रशासन और आम जनता को गुमराह न कर सके













