उद्योग विभाग में ‘बाबू राज’ हावी — समय-नियम ध्वस्त, सिस्टम बेबस, जिम्मेदार खामोश
उद्योग विभाग में ‘बाबू राज’ हावी — समय-नियम ध्वस्त, सिस्टम बेबस, जिम्मेदार खामोश

कटनी : मनोज सिंह परिहार
कटनी/जिला मुख्यालय — सरकारी दफ्तरों में समय पालन और अनुशासन की बातें भले ही कागजों में सख्ती से लिखी हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। ताजा मामला उद्योग विभाग का सामने आया है, जहां पदस्थ बाबू दुर्गा प्रसाद सोनी पर गंभीर आरोप लग रहे हैं कि वे नियमों को खुलेआम नजरअंदाज कर रहे हैं सूत्रों की मानें तो जहां कार्यालय का निर्धारित समय सुबह का है, वहीं दुर्गा प्रसाद सोनी की उपस्थिति अक्सर 11:30 बजे के बाद ही दर्ज होती है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि कार्यालय पहुंचने के बाद भी वे अपने काम में सक्रिय रहने के बजाय किसी खाली या एकांत चेंबर में जाकर आराम करते दिखाई देते हैं सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब कुछ ड्यूटी के दौरान खुलेआम होता है, लेकिन न तो किसी अधिकारी का डर दिखाई देता है और न ही जवाबदेही का कोई भाव। विभागीय अंदरूनी चर्चाओं के अनुसार, संबंधित अधिकारियों से उनकी मजबूत पकड़ के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है यह स्थिति “जब सैंया भए कोतवाल, तो डर काहे का” वाली कहावत को चरितार्थ करती नजर आ रही है। एक तरफ आम कर्मचारी समय पर उपस्थिति और काम के दबाव में रहते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों से पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नियम क्या कहते हैं?
मध्यप्रदेश शासकीय सेवा (आचरण) नियमों के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी का निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य है। बिना अनुमति देर से आना और कार्य के दौरान लापरवाही बरतना स्पष्ट रूप से अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में विभागीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी तय है।
बड़ा सवाल
क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेंगे? या फिर ‘आराम फरमाने का यह सिस्टम’ यूं ही चलता रहेगा और नियम केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?













