विजयराघवगढ़ जनपद में नियुक्ति पर बवाल — RTI के बाद अब कानूनी घेरा, पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

कटनी | मनोज सिंह परिहार की रिपोर्ट
कटनी जिले के जनपद पंचायत विजयराघवगढ़ में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर पदस्थ साक्षी श्रीवास्तव की नियुक्ति को लेकर विवाद अब गहराता जा रहा है। पारदर्शिता और नियमों के पालन पर उठ रहे सवालों के बीच यह मामला अब सीधे तौर पर कानूनी मोड़ ले चुका है सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध न होने के बाद आवेदक ने प्रथम अपील दायर करने की तैयारी कर ली है। निर्धारित समयसीमा पूरी होने के बाद अपीलकर्ता को मजबूरन यह कदम उठाना पड़ा, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है सूत्रों की मानें तो साक्षी श्रीवास्तव की नियुक्ति प्रक्रिया में न तो विधिवत विज्ञापन जारी किया गया और न ही चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक किया गया। ऐसे में पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं और यह आशंका जताई जा रही है कि नियुक्ति में नियमों की अनदेखी की गई है सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अन्य आवेदकों की सूची, चयन समिति का गठन और चयन का आधार भी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
RTI आवेदन में मांगी गई प्रमुख जानकारी:
साक्षी श्रीवास्तव की नियुक्ति किस आधार और किस दिनांक को की गई
संबंधित पद के लिए किन समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित हुआ, उसकी प्रमाणित प्रति
प्राप्त सभी आवेदनों की सूची
चयन समिति का गठन और चयन प्रक्रिया का पूरा विवरण
चयनित अभ्यर्थी के चयन का आधार
RTI Act 2005 की लागू धाराएं:
इस मामले में सूचना न देना कई कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन माना जा रहा है—
धारा 6(1): नागरिक को सूचना मांगने का अधिकार
धारा 7(1): 30 दिनों के भीतर सूचना देना अनिवार्य
धारा 7(8): सूचना न देने पर कारण बताना जरूरी
धारा 19(1): प्रथम अपील का अधिकार
धारा 20(1): सूचना देने में लापरवाही पर जुर्माने का प्रावधान
जनता में बढ़ता आक्रोश:
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिकायतकर्ता के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का साफ कहना है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती, तो प्रशासन को जानकारी छिपाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
सबसे बड़ा सवाल:
क्या जनपद पंचायत में नियुक्तियां नियमों के तहत हो रही हैं या फिर मनमानी और सिफारिशों का खेल जारी है? अब सभी की नजर प्रथम अपील के बाद प्रशासन के रुख पर टिकी हुई है। क्या इस कार्रवाई के बाद नियुक्ति प्रक्रिया की सच्चाई सामने आएगी या फिर मामला दबा दिया जाएगा — यह आने वाला समय तय करेगा शिकायतकर्ता ने भी सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिर किन नियमों के तहत यह नियुक्ति की गई और लोक सूचना अधिकारी किस आधार पर जानकारी देने से बच रहे हैं।













