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खाकी की दबंगई या कानून व्यवस्था? कटनी में दलित परिवार की शादी बनी रणभूमि, पुलिस लाठीचार्ज से मचा हड़कंप

खाकी की दबंगई या कानून व्यवस्था? कटनी में दलित परिवार की शादी बनी रणभूमि, पुलिस लाठीचार्ज से मचा हड़कंप

✍️ दिनेश पुरी गोस्वामी की रिपोर्ट

कटनी। जिले के इंदिरा नगर स्थित बाल गंगाधर तिलक वार्ड में एक दलित परिवार के घर खुशियों का माहौल उस समय चीख-पुकार में बदल गया, जब देर रात पहुंची पुलिस ने बारातियों पर जमकर लाठियां बरसा दीं। इस घटना ने न केवल पूरे इलाके को झकझोर दिया, बल्कि दलित समाज में भारी आक्रोश भी पैदा कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

घटना 20 अप्रैल की रात की बताई जा रही है, जब मैहर के अमदरा से एक बारात कटनी पहुंची थी। बस खराब होने के कारण बारात देरी से कार्यक्रम स्थल पर पहुंची, जिसके चलते देर रात तक डीजे बजता रहा। तेज आवाज की शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंची और डीजे बंद करने के निर्देश दिए इसी बात को लेकर बारातियों और पुलिस के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई। आरोप है कि पुलिस ने बिना स्थिति को समझे निहत्थे बारातियों पर लाठीचार्ज कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने दूल्हे के भाई, चाचा सहित करीब 12 लोगों को बुरी तरह पीटा, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कुछ के सिर फट गए, तो किसी के हाथ में फ्रैक्चर हो गया। पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं और बच्चों के साथ भी धक्का-मुक्की की और कुछ लोगों को थाने ले जाकर प्रताड़ित किया इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि पुलिस ने विवाह मंडप से दूल्हा-दुल्हन को उठाकर थाने ले जाने की कोशिश की, जो सामाजिक और मानवीय मूल्यों के खिलाफ माना जा रहा है।

कांग्रेस ने जताया कड़ा विरोध

इस पूरे मामले को लेकर शहर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट अमित शुक्ला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे दलित परिवार के साथ अन्याय और अमानवीय व्यवहार बताया उन्होंने पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा से मुलाकात कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, निलंबन और सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।

SP की सख्ती, दो पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा ने तुरंत संज्ञान लिया। जांच के आदेश देते हुए ASI सौरभ सोनी और सिद्धार्थ राय को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है।

एसपी ने स्पष्ट कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन कानून के नाम पर किसी भी तरह की बर्बरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बड़ा सवाल

क्या कानून व्यवस्था के नाम पर इस तरह की कार्रवाई जायज है?

क्या निर्दोष बारातियों पर लाठीचार्ज पुलिस की कार्यशैली पर सवाल नहीं खड़े करता? फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

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अजय शर्मा | प्रधान संपादक

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