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विजयराघवगढ़ जनपद में नियुक्ति को लेकर घमासान, बाबू की बेटी को नौकरी देने के आरोप, RTI के सवालों पर विभाग मौन

विजयराघवगढ़ जनपद में नियुक्ति को लेकर घमासान, बाबू की बेटी को नौकरी देने के आरोप, RTI के सवालों पर विभाग मौन

कटनी : मनोज सिंह परिहार

कटनी जिले की जनपद पंचायत विजयराघवगढ़ एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला सीधे तौर पर नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़ा हुआ है। कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर पदस्थ साक्षी श्रीवास्तव की नियुक्ति को लेकर उठे सवाल अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुके हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभाग में वर्षों से प्रभाव रखने वाले शरद श्रीवास्तव ने अपने प्रभाव और पकड़ का इस्तेमाल करते हुए अपनी ही पुत्री को पद पर बैठाने का काम किया शिकायतकर्ता मनोज सिंह परिहार ने पूरे मामले को “जनपद में परिवारवाद और संरक्षण तंत्र” का उदाहरण बताते हुए कहा कि यदि नियुक्ति पूरी तरह नियमों के तहत हुई है तो विभाग रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से आखिर क्यों बच रहा है। RTI के तहत मांगी गई जानकारी महीनों बाद भी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े विज्ञापन, आवेदन पत्र, चयन सूची, योग्यता प्रमाणपत्र, अनुभव दस्तावेज और नियुक्ति आदेश की प्रतियां मांगी थीं, लेकिन विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी देने के बजाय लगातार टालमटोल की जा रही है। प्रथम अपील के बाद भी जानकारी न देना अब कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमसम्मत है तो विभाग को दस्तावेज सार्वजनिक करने में डर कैसा सूत्रों की मानें तो जनपद कार्यालय के भीतर भी इस नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि “ऊपर तक पकड़” होने के कारण मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं कई युवाओं में इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। बेरोजगार युवाओं का कहना है कि यदि सरकारी पद रिश्तेदारी और प्रभाव के आधार पर बांटे जाएंगे तो योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया कि केवल साक्षी श्रीवास्तव ही नहीं बल्कि उनके पिता शरद श्रीवास्तव की नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड को लेकर भी कई सवाल हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में भी अलग से RTI आवेदन लगाया गया है। यदि दस्तावेज सामने आते हैं तो कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक संगठनों में भी इस मामले को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। चर्चा है कि जल्द ही पत्रकार संगठन “द जर्नलिस्ट एसोसिएशन” के माध्यम से कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जाएगी। शिकायतकर्ता ने साफ कहा है कि यदि विभाग जानकारी देने में आनाकानी करता रहा तो द्वितीय अपील से लेकर न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजयराघवगढ़ जनपद में सरकारी नियुक्तियां वास्तव में पारदर्शी तरीके से हो रही हैं, या फिर विभागीय रसूख और रिश्तेदारी के दम पर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है? क्या RTI के सवालों से बचता विभाग खुद अपनी कार्यप्रणाली पर संदेह खड़ा कर रहा है? आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Author

  • अजय शर्मा | प्रधान संपादक


    ✔ भारत सरकार से मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार
    RNI / PRGI / MPHIN/26/A0617

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